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April 11, 2026 11:50 pm

शहरकोल में ‘मौत का गड्ढा’: 80 फीट गहरी परित्यक्त खदान हर दिन दे रही हादसे को न्योता

सड़क किनारे मौत का गड्ढा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

सतनाम सिंह

पाकुड़ शहर से सटे शहरकोल गांव की शांत सुबहें अब एक अनदेखे डर के साए में गुजरती हैं। पाकुड़ हिरणपुर मुख्य रोड पर अमरजीत बलिहार चौक के ठीक चंद दुरी पर एसबी ब्रदर्स के पीछे, एक पुरानी बंद पड़ी खदान मुंह खोले खड़ी है—मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हो। करीब 70 से 80 फीट गहरी यह खदान न सिर्फ भयावह है, बल्कि पूरी तरह असुरक्षित भी।चारों ओर कोई घेराबंदी नहीं, न चेतावनी बोर्ड, न ही सुरक्षा का कोई इंतजाम—बस गहरी खाई और उसके भीतर उभरे नुकीले पत्थर। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस खदान में पहले भी कई लोग गिर चुके हैं। हर हादसे के बाद कुछ दिन चर्चा होती है, फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है—लेकिन खतरा वहीं का वहीं बना रहता है।गांव के बच्चों के लिए यह जगह किसी अनजाने खेल का मैदान बन जाती है, तो राहगीरों के लिए यह एक छुपा हुआ खतरा। बरसात के दिनों में जब खदान पानी से भर जाती है, तब इसकी गहराई का अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है—और जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।माइनिंग नियम साफ कहते हैं कि पत्थर उत्खनन के बाद खदान को पूरी तरह बंद करना जरूरी है। इसे मिट्टी से भरकर समतल किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई दुर्घटना न हो। लेकिन शहरकोल की यह खदान इन नियमों की खुली अनदेखी की कहानी बयां कर रही है।जानकारी के अनुसार, लीज समाप्त होने के बाद खनन विभाग खदान की नापी कर यह सुनिश्चित करता है कि खनन निर्धारित सीमा के भीतर हुआ है या नहीं। इसके बाद लीज सरेंडर की प्रक्रिया पूरी होती है, जिसमें खदान को सुरक्षित रूप से बंद करना अनिवार्य होता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश मामलों में यह प्रक्रिया सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाती है।शहरकोल की यह खदान अब सिर्फ एक गड्ढा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है। ग्रामीणों की मांग है कि इस खतरनाक खदान को अविलंब मिट्टी से भरकर बंद किया जाए और जिम्मेदार खदान मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।क्योंकि सवाल सिर्फ एक गड्ढे का नहीं है सवाल उन जिंदगियों का है, जो हर दिन इस ‘मौत के गड्ढे’ के किनारे से गुजरती हैं।

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