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January 23, 2026 7:09 pm

स्कूल के साथ-साथ करियर की तैयारी: अब विकल्प नहीं, भारत की राष्ट्रीय आवश्यकता

डॉ. संजीव सिन्हा के शिक्षा सुधार मॉडल पर केंद्र सरकार के स्तर पर गंभीर मंथन

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सुधीर सिन्हा


गिरिडीह। तेज़ी से बदलते वैश्विक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में भारत की शिक्षा व्यवस्था एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। आज यह स्पष्ट हो चुका है कि “स्कूल के साथ-साथ करियर की तैयारी” कोई वैकल्पिक प्रयोग नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के लिए एक अनिवार्य राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुकी है। इसी दूरदर्शी सोच को ज़मीनी स्तर पर साकार करते हुए प्रख्यात शिक्षा सुधारक डॉ. संजीव सिन्हा द्वारा विकसित स्कूल करियर इंटीग्रेटेड एजुकेशन मॉडल को बीते एक वर्ष से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इस मॉडल के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक, मापनीय और परिवर्तनकारी रहे हैं चाहे वह विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति हो, करियर की स्पष्टता हो या अभिभावकों का विश्वास। इन ठोस और सकारात्मक परिणामों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा इस मॉडल को राष्ट्रीय शिक्षा सुधारों में शामिल करने पर गंभीर मंथन किया जाना शिक्षा जगत में एक ऐतिहासिक और आशाजनक संकेत माना जा रहा है।

ज़मीनी अनुभव से राष्ट्रीय दृष्टि तक

डॉ. संजीव सिन्हा एवं उनकी टीम द्वारा झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ आयोजित सैकड़ों सेमिनारों, संवाद बैठकों और शैक्षणिक विमर्शों से एक स्पष्ट निष्कर्ष सामने आया है। यदि स्कूल पाठ्यक्रम, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और करियर फाउंडेशन को एकीकृत कर दिया जाए, तो हर स्कूल स्वयं एक करियर रेडी कैंपस बन सकता है।

केंद्र सरकार को दिए गए प्रमुख सुझाव

स्कूल पाठ्यक्रम का पुनर्संरचना इस प्रकार की जाए कि स्कूली शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एक ही शैक्षणिक धारा में आगे बढ़े। स्कूल परिसरों में ही करियर फाउंडेशन प्रोग्राम्स को संस्थागत रूप दिया जाए।आवश्यकता अनुसार स्कूल के बाद शाम के समय ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था कर अध्ययन और पारिवारिक जीवन में संतुलन सुनिश्चित किया जाए। विद्यार्थियों को समय-समय पर वैज्ञानिक करियर काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए। बच्चों को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाली सोच और उद्यमशील मानसिकता के साथ तैयार किया जाए।

इस मॉडल से होने वाले व्यापक और दूरगामी लाभ

विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक एवं मानसिक दबाव में उल्लेखनीय कमी। स्कूल के बाद महंगी, असंगठित और दिशाहीन कोचिंग पर निर्भरता समाप्त। अभिभावकों पर पड़ने वाला भारी आर्थिक बोझ कम होगा। बच्चे स्कूल के बाद ऑनलाइन घर पर रहकर पढ़ेंगे, जिससे पारिवारिक संस्कार और सामाजिक जुड़ाव मजबूत होगा। अभिभावक-बच्चों के बीच बढ़ती संवाद-हीनता की खाई कम होगी। विद्यार्थी केवल जेईई नीट तक सीमित न रहकर मल्टी सेक्टोरल करियर फाउंडेशन के साथ आगे बढ़ सकेंगे। स्कूल स्तर पर ही लक्ष्य निर्धारण (गोल सेटिंग) संभव होगा, जिससे ड्रॉप-आउट और भ्रम की समस्या में कमी आएगी।

डॉ. संजीव सिन्हा का स्पष्ट मत

यदि भारत को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर, सशक्त और वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाना है, तो शिक्षा को केवल परीक्षा-केंद्रित नहीं, बल्कि करियर-केंद्रित और जीवन-कौशल आधारित बनाना होगा। स्कूल स्तर पर ही करियर की स्पष्ट दिशा देना अब समय की मांग है।
सुधीर सिन्हा
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