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March 10, 2026 2:51 am

खनन से हजारों करोड़ का राजस्व, लेकिन स्वास्थ्य सुविधा बदहाल, खनन क्षेत्रों में एम्बुलेंस तक नहीं।

दो-दो कोल कंपनियों और बड़े पत्थर कारोबार के बावजूद आदिवासी क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर, CSR और DMFT फंड पर उठे सवाल।

पाकुड़ जिले के आदिवासी बहुल खनन क्षेत्र पाकुड़ व अमड़ापाड़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। क्षेत्र में दो-दो कोल कंपनियों तथा बड़े पैमाने पर पत्थर कारोबार होने के बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस का अभाव स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार अमड़ापाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की कुछ बुनियादी सुविधाएं तो मौजूद हैं, लेकिन गंभीर रूप से बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना के शिकार लोगों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस नहीं होने से स्थिति काफी कठिन हो जाती है। मजबूरी में मरीजों को निजी वाहनों या अन्य अस्थायी साधनों से दूर-दराज के अस्पतालों तक ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अमड़ापाड़ा खनन क्षेत्र होने के कारण यहां से सरकार को कोयला और पत्थर खनन के माध्यम से भारी राजस्व प्राप्त होता है। इसके अलावा खनन कंपनियां कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च दिखाती हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद कमजोर स्थिति में हैं।
लोगों का कहना है कि यदि खनन कंपनियां CSR मद से या जिला प्रशासन DMFT फंड से पहल करे तो अमड़ापाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था आसानी से की जा सकती है। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अमड़ापाड़ा जैसे दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए जल्द से जल्द स्थायी रूप से एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके।

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