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January 25, 2026 6:12 am

महेशपुर की सड़कें बनीं ‘मौत का कुआं’, तीन टोटो पलटे, पांच घायल, नेता-प्रशासन ‘गड्ढे’ में गायब!

जनता का सवाल— आखिर कब जागेगा सिस्टम?

पाकुड़/ महेशपुर प्रखंड मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़कों की बदहाली ने बुधवार को एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही और नेताओं की निष्क्रियता को बेनकाब कर दिया,गोकुलपुर-चापगांव मार्ग पर गड्ढों से भरी मुख्य सड़क में एक ही दिन में तीन ई-रिक्शा (टोटो) पलट गए। हादसे में एक बच्चे सहित पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे ने महज वाहनों को नहीं पलटा, बल्कि जनप्रतिनिधियों के खोखले दावों और जिम्मेदारों की संवेदनहीनता को भी नंगा कर दिया।

सड़क नहीं, खतरनाक दलदल बनी महेशपुर की पहचान

बरसात के बाद सड़कें गड्ढों से नहीं, गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। कई जगहों पर पानी की गहराई तीन फीट तक पहुंच चुकी है, जिससे आम लोगों को हर रोज़ जान हथेली पर लेकर सफर करना पड़ रहा है। मुख्यालय से अस्पताल और थाना जैसे जरूरी संस्थानों तक की सड़कें भी जर्जर और जानलेवा बनी हुई हैं।

नेता आते हैं, वादे करते हैं… फिर गड्ढों में गुम हो जाते हैं

हादसे के बाद मौके पर जुटे ग्रामीणों ने फूट-फूटकर प्रशासन और नेताओं को कोसा। उनका साफ कहना है—हर चुनाव में वादा करते हैं कि सड़क बनेगी, लेकिन हर बार सिर्फ वोट लेकर चले जाते हैं। सड़क अब भी वहीं है— टूटी, गड्ढों में डूबी और जानलेवा।

जब सिस्टम फेल हुआ, तो जनता ने उठाया ज़िम्मा।

हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीण अजीत कुमार साह, बापन उपाध्याय, सानू और कॉलेज शेख ने बिना किसी सरकारी मदद के खुद फावड़ा-कुदाल उठाकर सड़क में पड़े गड्ढों को भरने की कोशिश की। ईंट, डस्ट और पत्थर से लोगों ने जलजमाव वाले हिस्सों में काम किया ताकि और हादसे टाले जा सकें।

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