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January 14, 2026 7:20 am

आत्मनिर्भर होकर जिंदगी को खुशहाल बना रहे हैं समियल मोहली

डलिया बुनाई का कार्य परंपरागत हुनर है

सामियल मोहली बांस से बुन रहे समृद्धि की ‘डलिया’

बोरियो/मो हलीम अंसारी

झारखंड राज्य साहेबगंज जिला के बोरियो प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव में निम्नवर्गीय परिवार से जन्मे समियल मोहली की कहानी बिल्कुल रोचक है समियल मोहली बताते हैं कि उनकी उम्र 55 वर्ष है लेकिन ये सूप और डाली बनाने का काम उन्हें विरासत में मिला है उनके बाप दादा भी यही कार्य कर गुजर बसर करते थे वही समियल मोहली के परिवार में पत्नी और दो बेटे और एक बेटी है बड़े बेटा सुशील मोहली की उम्र 29 वर्ष है सिर्फ आठवी तक पढ़ाई कर पाए फिर छोटे बेटे और बेटी को भी ज्यादा नहीं पढ़ा पाए बोरियो प्रखंड धोबना गांव की कहानी बिल्कुल दर्दभरी है हालांकि उनकी उनकी कहानी बेहद संजीदा है समियल मोहली की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के बावजूद वो कार्य करने में जुटे हैं हालांकि वो बताते हैं कि एक समय था जो जब उन्हें इस सूप डालिया की रुचि अधिक थी और डिमांड भी काफी ज्यादा थी उनके घर आकर ट्रक आते और व्यापारी लेकर जाते थे फिर धीरे धीरे खर्चे ज्यादा होने लगे और कमाई कम होने लगे महंगाई बढ़ती गई इसके बावजूद परिवार बाल बच्चे को किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होने दिया। बांस की डलिया से होने वाली आय ने उसका आत्मविश्वास बढ़ते गए हिम्मत हार नहीं मानी।डलिया बुनाई का काम करने वाली सामियल मोहली को अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ता है। अपनी कमाई से वह बच्चों की बेहतर परवरिश के साथ ही उन्होंने अपने परिवार पर ध्यान दे रहे हैं ताकि परिवार खुश रहे बने। उसे घर परिवार चलाने को लेकर धन की जरूरत रहती है। घर परिवार चलाना बड़ी समस्या था लेकिन डलिया सूप बनाकर अपनी घर चला रहे हैं, वह परिवार की बेहतरी में कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रहे है। पूरे परिवार के लोग डलिया बुनाई के साथ परिवार की समृद्धि का ताना-बाना बुन रहे हैं। पूरे परिवार आत्मनिर्भर होकर जिंदगी को खुशहाल बना रहे हैं समियल मोहली के हाथ में डलिया बुनाई का परंपरागत हुनर है बाजार में खूब पसंद की जा रहीं हैं समियल मोहली बांस खरीदने के बाद चीरकर ताने तैयार करती हैं। इसके बाद उनसे डलिया बुनते हैं। इन डलियों को बाजार में खूब पसंद किया जा रहा है।पूरे परिवार के लोग सप्ताह भर में तैयार होते 25 से 30 डलिया व सूप सब मिलकर एक सप्ताह में 25 से 30 छोटी, मझोली व बड़ी डलिया के अलावा सिकौला, सूप आदि तैयार कर लेती हैं। इसकी बिक्री बोरियो बाजार हटिया में व्यापारी से होती है शादियों में भी होता इस्तेमाल बांस की इन डलिया का उपयोग शादी विवाहों के साथ सजावटी कामों में होता है। शादी-विवाह के दौरान इनकी मांग काफी बढ़ जाती है हस्तनिर्मित डलिया बुनने के हुनर से दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। हैं छोटी डलिया बनती- एक दिन में चार,बड़ी डलिया बनती- तीन दिन में एक

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