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January 23, 2026 10:01 pm

युवाओं के प्रेरणाश्रोत हैं स्वामी विवेकानंद – डॉ दिलीप

पांकी/पलामू।
मजदूर किसान महाविद्यालय, डंडार कला में गुरुवार को महान आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक एवं समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद की 162वीं जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा महोत्सव) के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर देशभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और युवाओं के उत्साह से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ स्वामी विवेकानंद के विचारों और आदर्शों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिलीप राम, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. रामबिलास, डॉ. पूनम कुमारी सहित सभी शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, एनएसएस स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई।

मौके पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिलीप राम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन पूरे भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वे युवाओं के आदर्श और प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने बताया कि 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में अपने ऐतिहासिक भाषण के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया। वहीं से वे विश्वविख्यात हुए।
डॉ. दिलीप राम ने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विचार आज के युवाओं को आत्मविश्वास, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. रामबिलास ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत नहीं बल्कि एक महान दार्शनिक, समाज सुधारक और युगद्रष्टा थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, वेदांत और मानवता के मूल्यों को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

वहीं डॉ. पूनम कुमारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में कोलकाता के निकट बेलूर में बेलूर मठ की स्थापना की, जो आज भी आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने हिंदू धर्म को एक प्रमुख विश्व धर्म के रूप में प्रतिष्ठा दिलाई और पूरे भारत में वेदांत एवं योग के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को आत्मबल, राष्ट्रप्रेम और सेवा भाव से जोड़ते हैं।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने गीत, संगीत एवं मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत नृत्य विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा। नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में खुशबू कुमारी, प्रतिमा कुमारी, भूमिका कुमारी, रिमझिम कुमारी, पूनम कुमारी, चंचला कुमारी, गौसिया प्रवीण, प्रीतम कुमारी, प्रदीप कुमार सिंह, शुभम कुमार सहित कई छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने, चरित्र निर्माण पर बल देने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। पूरे आयोजन ने युवाओं में नई ऊर्जा, प्रेरणा और सकारात्मक सोच का संचार किया।

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