पाकुड़ महाविद्यालय में शैक्षणिक अव्यवस्थाओं और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को प्रशासनिक आश्वासन के बाद समाप्त हो गई। महाविद्यालय प्राचार्य द्वारा लिखित नोटिस जारी किए जाने और प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद कार्यकर्ताओं ने जूस पीकर अनशन तोड़ा। ABVP की यह भूख हड़ताल 21 जनवरी को सुबह 11 बजे महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर शुरू हुई थी। कड़ाके की ठंड के बीच 16 कार्यकर्ता पूरी रात धरने पर डटे रहे। दूसरे दिन सुबह आंदोलन को छात्रों का व्यापक समर्थन मिला और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं धरनास्थल पर जुट गए। परिषद की प्रमुख मांगों में सेमेस्टर-4 के परीक्षा परिणाम में हुई त्रुटियों का सुधार, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था, वाई-फाई सुविधा बहाल करना, ट्यूशन फीस के अनुरूप शैक्षणिक सुविधाएं देना तथा बीएड पाठ्यक्रम से जुड़ी समस्याओं का समाधान शामिल था।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. युगल झा ने दोपहर करीब 2 बजे लिखित नोटिस जारी किया। इसमें सेमेस्टर-4 परीक्षा परिणाम में सुधार की जिम्मेदारी कॉलेज स्तर पर लेने और 10 दिनों के भीतर पेयजल, शौचालय, वाई-फाई सहित अन्य सुविधाएं बहाल करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही बीएड की मान्यता और प्रशासनिक भवन व मल्टीपर्पज हॉल निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए विश्वविद्यालय को पत्र भेजने की बात कही गई। इस दौरान विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग के अधिकारियों ने फोन पर ABVP के प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय से बातचीत भी की। लिखित आश्वासन मिलने के बाद प्राचार्य डॉ. युगल झा और प्रधान लिपिक नीरज कुमार ने कॉलेज अध्यक्ष दुलाल चंद्र दास और प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय ने कहा कि यह आंदोलन छात्र हितों से जुड़ा है और परिषद प्रशासन के आश्वासनों की लगातार निगरानी करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। भूख हड़ताल में कॉलेज अध्यक्ष दुलाल चंद्र दास, जिला संयोजक सुमित पांडे, कॉलेज उपाध्यक्ष सुमित सेन, नगर सह मंत्री रॉकी दास, चंदन पहाड़िया, दिनेश मुर्मू, संतोष तुरी, आर्यन कुमार, कैलाश शाह, रोशन शाह, प्रीतम कुमार भगत, अफराज अहमद, राकेश प्रमाणिक, सुलभ दास, रंजीत रॉय, सफीउल्ला शेख, अरबाज अंसारी सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।









