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January 26, 2026 1:29 am

जेल की चारदीवारी के भीतर संवर रहा बंदियों का भविष्य, हुनर से जुड़ेंगे आजीविका की मुख्यधारा से।

पेपर बैग निर्माण का 12 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, उपायुक्त ने बांटे प्रमाणपत्र।

पाकुड़ मंडलकारा की जेल की दीवारें अब सिर्फ सजा काटने की जगह नहीं रहीं, बल्कि कैदियों के जीवन को नई दिशा देने वाली एक सशक्त प्रयोगशाला बनती जा रही हैं। बुधवार को भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) द्वारा बंदियों के लिए आयोजित 12 दिवसीय पेपर बैग निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। इस मौके पर उपायुक्त मनीष कुमार समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया और सफल प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। समापन समारोह में उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा, “कौशल ही व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है। बंदियों को हुनरमंद बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ा जा सकता है। सजा पूरी करने के बाद भी इनके पास एक नई शुरुआत का अवसर होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि आज के समय में स्वरोजगार की असीम संभावनाएं हैं, और पाकुड़ जिले में युवाओं व सखी मंडलों की महिलाएं इसके सशक्त उदाहरण हैं। कार्यक्रम के दौरान RSETI पाकुड़ के निदेशक राजेश कुमार मिश्रा, मंडलकारा अधीक्षक दिलीप कुमार और वरिष्ठ संकाय अमित कुमार बर्धन ने भी अपने विचार साझा किए। सभी ने प्रशिक्षण से जुड़ी उपयोगी जानकारियों को साझा करते हुए बंदियों को स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दी। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को केवल पेपर बैग, फाइल, लिफाफा जैसे उत्पादों का निर्माण ही नहीं सिखाया गया, बल्कि विपणन, उद्यमिता विकास, वित्तीय समावेशन, समय प्रबंधन, बैंकिंग व बीमा आदि विषयों की भी जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण की प्रशिक्षक रंजू देवी थीं, जो जामताड़ा से हैं। आज के कार्यक्रम का मूल्यांकन नेशनल एकेडमी ऑफ रूडसेटी द्वारा नियुक्त अधिकारी अरुण नाथ तिवारी और वनपलाशी सरकार ने किया। समापन समारोह में कई अधिकारी, संस्थान प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।

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