पाकुड़: पुलिस इन्वेस्टिगेशन को और अधिक वैज्ञानिक, प्रमाणिक और दक्ष बनाने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय प्रमंडल स्तरीय पुलिस ड्यूटी मीट का समापन शुक्रवार को पुलिस लाइन परिसर में गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि दुमका के पुलिस महानिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, उपायुक्त मनीष कुमार, पाकुड़ एसपी निधि द्विवेदी, गोड्डा और जामताड़ा के एसपी शामिल हुए।
इस प्रशिक्षणात्मक प्रतियोगिता में संथाल परगना के सभी छह जिलों से पुलिस पदाधिकारी शामिल हुए। प्रतिभागियों को फॉरेंसिक जांच, साइबर एनालिसिस, फिंगरप्रिंट, क्राइम फोटोग्राफी और डॉग स्क्वाड ऑपरेशन जैसी आधुनिक इन्वेस्टिगेशन तकनीकों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के लिए रांची से आए विशेषज्ञ – अपराध जांच विभाग के संतोष सुधाकर (फिंगरप्रिंट), दिलीप कुमार महतो (फोटो ब्यूरो) और एतवा उरांव (डॉग स्क्वाड) – ने महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
प्रतिभागियों की मेहनत को मिला सम्मान
समापन अवसर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान आईजी शैलेन्द्र कुमार सिन्हा ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड पुलिस ने हाल ही में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 1 स्वर्ण और 4 रजत पदक हासिल किए। उन्होंने कहा, “आज का दौर प्रतिस्पर्धा का है, हमारे पुलिसकर्मियों को राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनानी चाहिए।”
“अनुसंधान हो तीव्र और सटीक” – उपायुक्त मनीष कुमार
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि तीन दिनों के इस प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों ने अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकल कर कुछ नया सीखा है, जो उनके कर्तव्यों को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अनुसंधान तेज़ गति से और सही दिशा में हो, ताकि समय पर न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
एसपी निधि द्विवेदी का प्रेरणादायक संबोधन
पाकुड़ एसपी निधि द्विवेदी ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पुलिस ड्यूटी मीट का मुख्य उद्देश्य यही है कि इन्वेस्टिगेशन को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत किया जाए। “जब हम कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत करें तो वे इतने सटीक हों कि अपराधियों को उचित सजा दिलाई जा सके।” उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे राज्य स्तर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाएं।
कार्यक्रम का सफल संचालन और पुलिसकर्मियों की भागीदारी यह दर्शाता है कि झारखंड पुलिस आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण को लेकर गंभीर है। यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता था, बल्कि एक ऐसा मंच भी बना जहाँ से पुलिस व्यवस्था को नए आयाम मिले।









