Search

February 23, 2026 6:08 am

पेशा कानून से आदिवासी अधिकार कमजोर, सरकार ने ग्राम सभा की ताकत छीनी, कामेश्वर दास।

राजकुमार भगत

Also Read: E-paper 29-01-2026

पाकुड़। झारखंड सरकार द्वारा हाल ही में पारित पेशा (PESA) कानून को शुक्रवार को सार्वजनिक किया गया, लेकिन यह कानून आदिवासी समाज के अधिकारों को सशक्त करने के बजाय उन्हें कमजोर करने वाला साबित हो रहा है। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री कामेश्वर दास ने इसे आदिवासी समाज के साथ “छल” करार देते हुए कहा कि यह कानून 1996 के मूल पेशा कानून की भावना के पूरी तरह विपरीत है। कामेश्वर दास ने कहा कि पेशा कानून का मूल उद्देश्य ग्राम सभा को सशक्त बनाना था, लेकिन वर्तमान स्वरूप में सरकार ने इसके अधिकांश अधिकार अपने और जिला प्रशासन के हाथों में ही सुरक्षित रखे हैं। इससे ग्राम सभा की संवैधानिक शक्तियों का सीधा हनन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस कानून के जरिए आदिवासी समाज की आत्मा को कुचलने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि कानून में रूढ़िवादी जनजातीय परंपराओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, जिससे ऐसे लोग भी लाभ उठा सकते हैं जिनका आदिवासी समाज से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। इससे असली हितग्राहियों के अधिकारों पर खतरा पैदा हो गया है।
कामेश्वर दास ने यह भी कहा कि वन उपज, खनिज संसाधन और जल स्रोतों पर नियंत्रण ग्राम सभा को देने के बजाय सरकार और प्रशासन ने खुद को निर्णायक बना लिया है, जो पेशा कानून की मूल अवधारणा के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज इस कानून को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से इस कानून में आवश्यक संशोधन करने की मांग करते हुए कहा कि जब तक ग्राम सभा को वास्तविक अधिकार नहीं मिलते, तब तक इसका विरोध जारी रहेगा।

Leave a Comment

लाइव क्रिकेट स्कोर