पाकुड़। अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू मुर्मू की जयंती के अवसर पर शनिवार को पूरे पाकुड़ जिले में श्रद्धा, सम्मान और गर्व का अद्भुत माहौल देखने को मिला। जिले के विभिन्न प्रखंडों—हिरणपुर, महेशपुर, लिट्टीपाड़ा, बरहेट और पाकुड़ नगर—में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक दलों के नेताओं और आम लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहर के सिदो-कान्हू पार्क से लेकर गांव-गांव तक आयोजित कार्यक्रमों में शहीदों की प्रतिमाओं और तस्वीरों पर माल्यार्पण कर उनके अद्वितीय बलिदान को याद किया गया। इस दौरान “सिदो-कान्हू अमर रहें” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। हिरणपुर के रामनाथपुर और प्रखंड कार्यालय परिसर में बीडीओ टुडू दिलीप, अंचलाधिकारी मनोज कुमार समेत अधिकारियों ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि सिदो-कान्हू ने अंग्रेजी हुकूमत और महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष कर आदिवासी समाज को नई दिशा दी। उनका बलिदान आज भी प्रेरणा देता है। महेशपुर में झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अब्दुल वदूद के नेतृत्व में जयंती मनाई गई, जहां कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि 1855 के संथाल हूल आंदोलन का नेतृत्व कर सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया, जो आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। पाकुड़ नगर स्थित सिदो-कान्हू पार्क में एसपी निधि द्विवेदी, पूर्व जिला अध्यक्ष श्याम यादव और भाजपा जिला अध्यक्ष सरिता मुर्मू समेत कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि सिदो-कान्हू का साहस और त्याग देश के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय है और युवाओं को उनके आदर्शों को अपनाना चाहिए। बरहेट के भोगनाडीह में सांसद विजय हांसदा ने शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। वहीं लिट्टीपाड़ा में विधायक हेमलाल मुर्मू ने मुख्य चौक और धर्मपुर मोड़ पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेते हुए कहा कि सिदो-कान्हू का संघर्ष हमारी पहचान और अधिकारों की नींव है।
पाकुड़िया क्षेत्र में विधायक प्रोफेसर स्टीफन मरांडी ने 1855 के ऐतिहासिक संथाल हूल आंदोलन को याद करते हुए कहा कि हजारों आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर शोषण के खिलाफ एक नई चेतना जगाई थी, जिसका असर आज भी संथाल परगना की पहचान में झलकता है। झामुमो जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम के नेतृत्व में भी कार्यकर्ताओं ने सिदो-कान्हू पार्क में माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने कहा कि सिदो-कान्हू केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और स्वाभिमान के जीवंत प्रतीक हैं। जिलेभर में आयोजित इन कार्यक्रमों में एक स्वर में यह संदेश दिया गया कि सिदो-कान्हू के दिखाए रास्ते पर चलकर ही समाज का समग्र विकास संभव है। उनके बलिदान और आदर्शों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।











