कुटुंब न्यायालय में गले मिलकर सुलझा मामला, जज के प्रयास रंग लाए
पाकुड़ व्यवहार न्यायालय स्थित प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में बुधवार को एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। वर्षों से अलग-अलग रह रहे बुजुर्ग पिता हज़ीकुल अब्दुल गनी मियां और उनके पुत्र इसराइल अंसारी के बीच चला आ रहा पारिवारिक विवाद आखिरकार खत्म हो गया। प्रधान न्यायाधीश रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से दोनों ने पुराने गिले-शिकवे भुलाए और एक-दूसरे को गले लगाकर साथ रहने का फैसला किया। मामला मूल भरण-पोषण वाद संख्या 297/2025 से जुड़ा था। पत्नी के निधन के बाद बुजुर्ग पिता हज़ीकुल अब्दुल गनी मियां भरण-पोषण और इलाज को लेकर कई परेशानियों से जूझ रहे थे। पारिवारिक मतभेद के कारण बेटे से दूरी बन गई थी। कोर्ट में चली लंबी काउंसलिंग और समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद खत्म करने का निर्णय लिया। प्रधान न्यायाधीश रजनीकांत पाठक ने पिता-पुत्र को भविष्य में प्रेम, सम्मान और आपसी सहयोग के साथ रहने की सीख दी और किसी भी तरह के विवाद से बचने की अपील की। समझौते के बाद बुजुर्ग पिता को फिर से बेटे का सहारा मिल गया, जिससे कोर्ट परिसर में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे। यह पहल ‘मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0’ अभियान के तहत नालसा (नई दिल्ली) और झालसा (रांची) के निर्देश पर चल रही है। अभियान का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के मार्गदर्शन में तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो की देखरेख में किया जा रहा है।





