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March 17, 2026 12:11 am

दिव्यांग के भरोसे दिव्यांग विद्यालय जहां पेड़ की छांव में स्कूल, छाया के साथ ही खिसकते हैं बच्चे…

शिक्षा विभाग है मोन, ना कभी होता है निरीक्षण और ना ही रख रखाव पर दिया जाता है ध्यान

सुस्मित तिवारी

हिरणपुर (पाकुड़ ) हम कंप्यूटर क्रांति के दौर में हैं, लेकिन आज भी झारखण्ड शिक्षा व्यवस्थाओं के मामले में काफी पीछे है। पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड स्थित हाथकाठी गाँव में दिव्यांग सह अनाथ आवासीय विद्यालय को देखकर चिराग तले अंधेरा वाली कहावत बिलकुल सटीक बैठती है। यहां न भवन है, न बेंच व डेस्क, जाड़ा, गर्मी हो या बरसात हर मौसम मे पेड़ के नीचे ही क्लास लगता है,अगर बरसात आती है तो बच्चे भागो-भागो का शोर मचाने लगते हैं।.यहाँ के सारे बच्चे अनाथ व दिव्यांग है…यह विधालय हिरणपुर के सिंचाई विभाग के कॉलोनी में दिव्यांग सह अनाथ आवासीय विद्यालय पेड़ की छांव में कई वर्षो से संचालित हो रहा है। इस विद्यालय में कुल 43 बच्चे पंजीकृत हैं ,और स्टाफ भी तैनात हैं, लेकिन नहीं हैं तो बस विभागीय व्यवस्थाएं। ऐसा नहीं है कि अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने उक्त विद्यालय की कायाकल्प करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए…और न ही बच्चों के भविष्य के बारे में सोचा। यहां पंजीकृत बच्चों को गर्मी और बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। जैसे-तैसे सूरज की तपन बढ़ती है, वैसे-वैसे धूप से बचने के लिए बच्चे छांव की तरफ खिसकते नजर आते हैं। विद्यालय में सिर्फ कोठरी नुमा छोटा सा कमरा वह भी सिंचाई विभाग की है, यह टूटे फूटे भवन में चलने वाले इस स्कूल में छोटा सा बरामदा व एक कोठरी नुमा छोटा सा कमरा जिसमें प्रधानाध्यापक कक्ष है। इसमें विभागीय रजिस्टर व मिडडे मील, बर्तन आदि रखे जाते हैं।…

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