राजकुमार भगत
वित्त वर्ष 21- 22 में 2300 करोड़ रुपए रेलवे को राजस्व प्राप्ति हुई थी
पाकुड़। भारतीय जनता पार्टी के पाकुड़ जिला अध्यक्ष अमृत पांडे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री व भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ ज़िले वासियों के लिए रेल मंत्री अश्वनि वैष्णव जी को पत्र लिखकर पाकुड़ में रेल यात्रियों को हो रही परेशानियों से रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार देश के विकास में क्षेत्रीय विषमता को समाप्त करने के लिए कृतसंकल्प है।झारखण्ड प्रदेश के पिछड़े आदिवासी बहुल पाकुड़ जिला से राजस्व संग्रहण में रेलवे को उल्लेखनीय योगदान देता रहा है। पाकुड़ से पत्थर व कोयला के ढुलाई में वित वर्ष 2021-22 में लगभग 2300 करोड़ रुपए रेलवे को आमदनी हुई है। जबकि आप इस विचार से सहमत होंगे कि राजस्व संग्रहण में बड़े योगदान के बावजूद इस क्षेत्र में रेल सुविधाओं का अनुपातिक विकास नहीं हो पाया है।भौगोलिक दृष्टि से पाकुड़ झारखण्ड-पश्चिम बंगाल के सीमा पर स्थित है। रोजगार की तलाश में और अन्य कारणों से लोग प0 बंगाल को दैनन्दिनी आते-जाते हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में सड़क मार्ग ही एकमात्र यातायात का साधन है जो कि सर्वसुलभ और सस्ता कतई नहीं है। इसी तरह पाकुड़ क्षेत्र से असंगठित क्षेत्र के मजदूर रोजगार की तलाश में सुदूर दक्षिण और पुर्वाेतर भारत के विभिन्न शहरों को जाते हैं। पाकुड़ में गाड़ी के ठहराव न होने के कारण उनकी यात्रा कठिन हो जाती है। सवारी गाड़ियों के ठहराव और नए गाड़ियों के परिचालन के सम्बन्ध में समय-समय पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा रेल मंत्रालय के संज्ञान में लाने के लिए प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है । इसी जनकांक्षाओं के अनुरुप पाकुड़ स्टेशन में गुवाहाटी-बंगलुरु एक्सप्रेस ट्रेन (12509/10) ,. कन्याकुमारी-विवेक एक्सप्रेस (22503/22504) , गुवाहाटी-हावड़ा-सराईहाट एक्सप्रेस (12345/12346) ,शताब्दी एक्सप्रेस (12041/12042) का पाकुड़ में ठहराव के साथ-साथ, मालदा-वर्धमान पैसेन्जर ट्रेन व अपर इंडिया एक्सप्रेस का पुनः परिचालन तथा पाकुड़ से दिल्ली जाने के लिए सीधी रेल सेवा।
का आग्रह बाबूलाल मरांडी ने रेल मंत्री जी से किया है ।
जनता की प्रतिक्रिया क्या है
इस संबंध में जनता की प्रतिक्रिया बड़ी ही सोचनीय। स्थानीय जनता का मानना है कि नई गाड़ी तो दूर की बात है, जो गाड़ी चलती थी उसमे से कई गाड़ी भाजपा शासित राज्य में बंद हो गई। पैसेंजर ट्रेन में एक्सप्रेस के भाड़ा लिए जा रहे हैं। स्थानीय विधायक, सांसद ने कई बार पत्र लिखकर एवं मुलाकात कर रेल समस्या की जानकारी मंत्री जी को दी है। स्थानीय जनता कहती है कि यदि यात्री गाड़ी का प्रचालन अधिक होगा या ठहराव होगा तो मालगाड़ी को असुविधा होगी। शायद इसलिए यहां यात्रियों को नजरअंदाज और पैसे को विशेष अहमियत दी गई है। स्थानीय जनता की मांग है कि कम से कम जो गाड़ी चलती थी उसे तो प्रारंभ कर दें। पैसेंजर ट्रेन में एक्सप्रेस का भाड़ा लेना बंद करें। इसके बाद भी यदि सरकार गाड़ियों का ठहराव देती है तो फिर स्वागत है।







