आ रे बादल ,काले बादल, गर्मी दूर भगा रे बादल
राजकुमार भगत
पाकुड़। जून महीने की 16 तारीख याद रहेगी,जहा जून महीने में लोग बारिश की वजह से गर्मी में कुछ राहत की सांस लेते हैं। वहीं इस वर्ष गर्मी में अभी तक राहत मिलती नही दिख रही, पिछले 1 सप्ताह से से भानु ने अपना प्रचंड रूप धारण कर धरा पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली है। पारा 42 से 45 ,46 तक हुआ जा रहा है, भानु की पावक शक्ति से वसुधा के केवल मानव मात्र ही नहीं बल्कि जीव जंतु पूरी तरह से हलकान हुए पड़े है, परेशान है, व्याकुल है। आम जनजीवन अस्त व्यस्त हैं। लोगों के लिए अपने घरों से निकलना मुश्किल हुआ जा रहा है,तेज तपती धूप लू ने मानव की जीवन को उलझा कर रख दिया है। सबसे परेशानी गरीब और मजदूरों को है। जो दैनिक मजदूरों पर अपने काम करते हैं । दो जून रोगी के लिए दिनभर सड़कों पर सब्जी बेचते हैं, ठेला लगाते हैं, जो ट्रैफिक पर ड्यूटी करते हैं। इट भट्टा में काम करते हैं।सुबह 9:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक गर्म तपती समीर ने मानव काया को विचलित कर दिया है। भवन में भी राहत नहीं। मानव मात्र गमछा बार-बार भिगोते हैं और अपनी तन को पोंछ कर आंशिक राहत पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। सोचिए जरा छोटे छोटे जीव जंतु क्या स्थिति होगी। इनको को बचाने की कोशिश कीजिए जल के साथ-साथ जीवन के लिए दाना भी डालिए।
अनायास ही याद आती है बचपन वो कविता, सूरज तपता धरती जलती, गर्म हवा जोरों से चलती, तन से बहुत पसीना बनता, हाथ सभी के पंखा रहता !!! अब सोच रहे हैं __आरे बादल काले बादल गर्मी दूर भगा रे बादल, रिमझिम तू पानी बरसा दे बादल! आरे बदल !!?? प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 जून से मानसून आने की संभावना है। राहत मिलती है या सूर्य देव की कृपा ऐसे ही बनी रहती है यह तो भविष्य के गर्त में है।
फिलहाल धरा को वृष्टि की आवश्यकता है।किसान प्रतिदिन आस लगाए बैठे हैं। यदि स्थिति यही रही तो आने वाले दिन बहुत गंभीर होंगे। अपने को गर्मी लू से बचाइए।
तेज तपती धूप में बाहर ना निकले प्याजऔर पानी का खूब प्रयोग करें।





