बढ़ती गर्मी से राहत पाने के लिए बासलोई नदी में छलांग लगाकर नहाते बच्चे
पाकुड़। अमड़ापाड़ा बाजार के समीप स्थित बासलोई नदी हैं. जो प्राकृतिक विहार और गुम्मा पहाड़ के बीच बहने वाली नदी हैं. मुख्य रूप से अनवरत प्रवाहित नदी की बहते पानी के कल-कल ध्वनि से लोगों के मन को मोह लेती हैं। वही बांसलोई नदी में बना घाट हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है. इस घाट में हमेशा पानी भरा रहता है. जहाँ बड़ों के साथ-साथ बच्चे नहाने और खेलने के लिए आते रहते हैं. स्थानीय लोग इस घाट को घाघ भी कहते हैं. आज रविवार को एक ओर जहां स्कूल बंद है, वहीं बढ़ रही गर्मी से बच्चे परेशान हैं, ऐसे में वे घाट में आकर नहाते हैं और पानी में खेल का आनंद भी उठाते हैं. इस दौरान बड़े लोग भी वहां नहाने के लिए जाते हैं. घाट एक तरह से बच्चों की तैराकी सीखने की जगह है, जहां वे धीरे-धीरे तैराकी सीखते हैं. गर्मी के मौसम में बांसलोई नदी जब सूख जाती हैं तब भी घाघ में पानी बना रहता है, इसलिए यहां पर लोग नहाने के लिए पहुंचते हैं. झरने के रूप में गिर रहा पानी घाघ के आकर्षण को और भी मनमोहक बना देता है, यही कारण है कि नये साल के उत्सव में पश्चिम बंगाल और आसपास के जिलों से लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं।







