राजकुमार भगत
पाकुड़। अब भ्रष्टाचार की भी सीमाएं हो गई है ।जब भ्रष्टाचार चरम पार होगी तो उनकी शिकायतें प्रारंभ होना लाजमी है। ऐसा ही कुछ देखने सुनने को मिल रहा है डीएससी कार्यालय में लंबे समय से बैठे प्रति नियोजित कर्मियों की। जो अपने कारनामे से शिक्षकों को रूष्ट कर रखा हैं। प्राथमिक विद्यालय शिक्षक एसोसिएशन के सचिव गोपाल सिंह ने आरडीडीई दुमका को आवेदन पत्र लिखकर कहां है कि पाकुड़ जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय में कुछ कर्मी ऐसे हैं जो प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण होने के बावजूद भी उसी कार्यालय में प्रति नियोजित कर दिया गया है । यह एक गंभीर विषय और मामला है कि इनका बार-बार इसी कार्यालय में प्रति नियोजन कैसे हो जाता है। उन्होंने आगे कहां है प्रमंडल अधीन विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थापित जिनका पदस्थापन अवधि 3 वर्ष या उससे अधिक हो उसे अनिवार्य रूप से किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किया जाना चाहिए । श्री सिंह ने कहा है कि कार्यालय सहायक अब्दुल जब्बार ,मोहम्मद रफीकुल इस्लाम, सादेक अली ,पाऊल हेमराम, मोहम्मद बेलाल सिद्धकी, काफी लंबे समय से कभी पाकुड़ तो कभी दुमका तो कभी साहिबगंज के कार्यालयों में ही प्रतिनियोजित हो रहे हैं ।जबकि जबकि संथाल परगना में देवघर गोड्डा जामताड़ा जिला भी हैं। आखिरकार इनका हस्तांतरण इन जिलों में कभी नहीं होता है क्यों। इससे समझा जा सकता है इनकी पैरवी कितनी मजबूत है। निदेशक माध्यमिक शिक्षा झारखंड रांची के 1750 दिनांक 2/6/1 2019 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि किसी एक स्थान पर लंबे समय तक कोई पद पर रहे तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। श्री सिंह ने अपने पत्र में सादेक अली के विरुद्ध वरनाबस किस्कू के स्थानांतरण अनुदान का आदेशों नहीं करने , ग्रेट टू के अंतर वेतन भुगतान आदेश देने में राशि की उगाही करने, मोहम्मद तहसीन कैसर के अनुकंपा के आधार पर नियुक्त का आवेदन स्थापना में भेजने के लिए मोहम्मद रफीक इस्लाम द्वारा रुपए की मांग करने, रामलाल रविदास से अब्दुल जब्बार द्वारा कार्य निष्पादन हेतु पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाया है ।इन्हें इन सब ने इसे मनगढ़ंत बात बताई और कहां वह हर हमेशा जहां भी रहे हैं ईमानदारी से काम करते रहें और आगे भी करते रहेंगे ।उन्होंने सभी बातों को एक सिरे से खारिज करते हुए इसे निराधार बताया।






