Search

April 27, 2026 10:40 pm

क्या सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा हो गया चैनपुर अंचल कार्यालय? 75 साल पुराने विवाद में बिना नोटिस नाम हटाने पर उठे गंभीर सवाल आखिर किसके इशारे पर



जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल

चैनपुर: कहते हैं कि इस देश में कानून सबसे ऊपर है और अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया का माना जाता है। लेकिन चैनपुर अंचल के इस मामले को देखकर ऐसा लगता है मानो यहां कोई अलग ही व्यवस्था चल रही हो, जहां अदालतों से पहले ही फैसले लिख दिए जाते हैं।
मामला रूपचंद साहू के परिवार की पैतृक जमीन का है। उनके दो पुत्र—भगवान साव और सीता साव—के परिवारों के बीच करीब 75 वर्षों से भूमि विवाद चला आ रहा है। यह विवाद सिविल कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और कई कानूनी प्रक्रियाएं भी हो चुकी हैं।



लेकिन हैरानी तब हुई जब अचानक चैनपुर अंचल कार्यालय ने सीता साव का नाम जमीन के रिकॉर्ड से हटा दिया, वह भी बिना किसी नोटिस के।  जब इस मामले की जानकारी आरटीआई के माध्यम से मांगी गई तो बताया गया कि यह कार्रवाई ऑनलाइन आवेदन के आधार पर कर दी गई।
अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी एक ऑनलाइन आवेदन के आधार पर इतने बड़े फैसले लिए जा सकते हैं? क्या प्रशासन को यह जरूरी नहीं लगा कि पहले मामले की जांच की जाए, दोनों पक्षों को सुना जाए और फिर कोई कदम उठाया जाए?
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि अगर अदालतों में मामला अभी भी विवादित है, तो अंचल कार्यालय ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई। तंज कसते हुए लोग कह रहे हैं कि लगता है अब जमीन का फैसला अदालतों से कम और प्रभाव, राजनीति और दबाव से ज्यादा तय होने लगा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देश में सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि माना जाता है, तो फिर चैनपुर अंचल कार्यालय ने किस अधिकार से यह कदम उठाया?
अब लोगों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किसके दबाव या किसके इशारे पर यह कार्रवाई की गई। क्योंकि जमीन का विवाद सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों के भरोसे का भी सवाल है।

img 20260313 wa000016685742369478421529

Leave a Comment

लाइव क्रिकेट स्कोर
error: Content is protected !!