अक्षय कुमार
मांडू (रामगढ़)। गुरुवार को
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), रामगढ़ में 15 अक्टूबर 2026 को किसान महिला दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मांडू, रामगढ़ की बाल विकास परियोजना अधिकारी शैल बाला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में 60 से अधिक महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों की आय में वृद्धि, आर्थिक आत्मनिर्भरता, पोषण सुरक्षा एवं आजीविका के स्थायी साधनों को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर एकीकृत कृषि प्रणाली, पोषण वाटिका के विकास तथा धान की कटाई के बाद परती भूमि के प्रभावी प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य अतिथि शैल बाला, बाल विकास परियोजना अधिकारी, मांडू ने अपने संबोधन में महिला किसानों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण के साथ-साथ परिवार और समुदाय के पोषण स्तर में सुधार के महत्व पर प्रकाश डाला।


उन्होंने महिलाओं को कृषि एवं पोषण से संबंधित जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा अपने घरों में पोषण वाटिका विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा महिला किसानों को वैज्ञानिक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कृषि और पोषण से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. सुधांशु शेखर, प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र रामगढ़ ने अपने संबोधन में कहा कि महिला किसान कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। उनकी क्षमता, कौशल एवं अनुभव का समुचित उपयोग कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र का उद्देश्य महिला किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों, व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपनी आय में वृद्धि कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि उपलब्ध भूमि, जल एवं अन्य कृषि संसाधनों का समन्वित उपयोग करते हुए फसल उत्पादन के साथ बकरी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन एवं सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को अपनाने से अतिरिक्त आय तथा वर्षभर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने महिला किसानों को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर कृषि आधारित उद्यम विकसित करने, उत्पादों के मूल्य संवर्धन एवं विपणन पर ध्यान देने तथा परिवार की कृषि संबंधी निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में पोषण वाटिका के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महिला किसानों को घर के आसपास मौसमी हरी सब्जियां, फल एवं अन्य पोषणयुक्त फसलें उगाने के लिए प्रेरित किया गया। इससे परिवार को ताजी एवं पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध होने के साथ-साथ अतिरिक्त उपज की बिक्री से घरेलू आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। धान की कटाई के बाद खेतों को खाली नहीं छोड़ने पर विशेष बल दिया गया। महिला किसानों को उपलब्ध नमी एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चना, मसूर, मटर, सरसों तथा अन्य उपयुक्त रबी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई। इससे भूमि का बेहतर उपयोग, फसल विविधीकरण तथा अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। इस अवसर पर पोषण वाटिका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली तीन महिला किसानों को सम्मानित किया गया। सम्मानित महिला किसानों में ललिता देवी, ग्राम अंबाटांड़; बिलासो हेम्ब्रम, ग्राम भेलगढ़ा; एवं लक्ष्मी देवी, सैंडी बस्ती शामिल थीं।


उनके योगदान को अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणादायक बताया गया। कार्यक्रम में डॉ. इंद्रजीत, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार); डॉ. धर्मजीत खेरवार, विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यानिकी); एवं सन्नी कुमार, प्रक्षेत्र प्रबंधक ने कृषि द्वारा महिला सशक्तिकरण में अपने विचार व्यक्त किये। विशेषज्ञों ने महिला किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, पोषण वाटिका प्रबंधन, आयवर्धक गतिविधियों तथा धान की परती भूमि के सदुपयोग के संबंध में तकनीकी जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के माध्यम से महिला किसानों को वैज्ञानिक ज्ञान, कौशल विकास, उद्यमशीलता एवं बाजार से बेहतर जुड़ाव के जरिए अपनी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। सशक्त महिला किसान, समृद्ध परिवार, सुरक्षित पोषण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं।





