राजकुमार भगत
पाकुड़। चार दिनों से चला आ रहा सूर्य उपासना का महापर्व छठ भगवान भास्कर के द्वितीय अर्घ्य के साथ संपन्न हो गया। घर और सड़कों पर छठ मैया के गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय सागर में गोते खा रहा था। गुरुवार को छठवर्ती द्वारा बड़ा टोकरी (डाला) सूप में गोटा नारियल, डाभ फल, हल्दी अदरक लगे पौधे, ईख सुतनी, ठेकुआ, दूध चावल से बने की केचनिया पान सुपारी,की आदि प्रसाद पश्चिम दिशा में सजाकर भगवान भास्कर डूबते हुए स्वरूप अस्ताचलगामी सूर्यदेव अर्घ्य दी । दूसरे दिन शुक्रवार को छठवर्ती द्वारा प्रातः काल 5:00 अपनी अपनी घाट पर पहुंच कर जलाशयों में डुबकी लगाई। अपने-अपने डाला को पूर्व दिशा की ओर रखकर उसमें घी के दीए जलाए।आधे पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर की आराधना की। प्रातः 5:50 में छठवर्ती के साथ-साथ परिवार के सदस्य ने उदयगामी भगवान भास्कर का गंगाजल एवं दूध से अर्घ्य दी। महिलाएं एक दूसरों को सिंदूर लगाकर सदा सुहागन रहने की कामना की। प्रसाद ग्रहण एवं वितरण की । 36 घंटे उपवास रहने के बाद पारण कर अपनी उपवास तोड़ी। इसी के साथ चार दिनों से चला रहा छठ महापर्व संपन्न हो गया।
छठ घाटों एवं मुख्य द्वार पर आकर्षक त्वरणद्वार एवं विद्युत सज्जा
शहर के चर्चित काली भाषण पोखर, टीनबांग्ला पोखर , कॉलेज रोड अकाडी पोखर, तलवाडंगा स्थित भट्टा पोखर, ठाकुर बाड़ी , शिव शीतला मंदिर ,सिंधी पड़ा, रेलवे कॉलोनी, कल पोखर , तांती पाड़ा , कलिकापुर , शहर कोल, बागती पाड़ा, साधुपोखर , आदि छठ घाटों में ऊंची ऊंची त्वरणद्वार बनाए गए हैं। घाटों के आसपास विद्युत सज्जा की गई है। आकर्षक प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। छठ घाट से लेकर बाहर सड़कों तक लाइटिंग की पूरी व्यवस्था की गई है। काली भाषण पोखर में आतिशबाजी की विशेष व्यवस्था की गई है।
ओटो टोटो चलते रहने से हुई परेशानी
मुख्य सड़कों पर लगातार ऑटो टोटो चलने से छठवृतियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह पहली बार हुआ जब सड़कों पर छठ पूजा के दौरान लगातार छोटी गाड़ियां दौड़ रही थी।







