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March 27, 2026 6:52 am

श्री शाश्वत स्मृति व महिला पतंजलि योग समिति के संयुक्त तत्वाधान में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस।

बजरंग पंडित

पाकुड़। श्री शाश्वत स्मृति व महिला पतंजलि योग समिति के संयुक्त तत्वाधान में श्री गुरुदेव कोचिंग सेंटर पाकुड़ के प्रांगण में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर श्री शाश्वत स्मृति के अध्यक्ष भागीरथ तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 8 मार्च 1908 को न्यूयॉर्क शहर से श्री गणेश हुआ था।इसके बाद 1910 में डेनमार्क की समाजवादी नेता क्लारा जेटकिंग ने महिलाओं को के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। वर्ष 1911 में ऑस्ट्रेलिया जर्मनी, डेनमार्क एवं स्वीटजरलैंड में महिला दिवस मनाए जाने को लेकर शुरुआत की गई। पुनः 1975 में संयुक्त राज्य (यू एन) की ओर से इसे आधिकारिक रूप में मान्यता दी गई। तब से लेकर आज तक यह प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में भी नारी को मां दुर्गा सरस्वती काली के रूप में पूजा जाता है। सृष्टि के प्रारंभ से ही हमारे शास्त्रों में नारी जाति की सम्मान रही है और आज भी कायम है। हमें महिलाओं के प्रति आदर और सम्मान की भावना रखनी चाहिए। शाश्वत स्मृति के उपाध्यक्ष डॉ मनोहर कुमार ने कहा कि में कहा पूरे विश्व में महिलाओं को सम्मान मिले इसके लिए नारी सशक्तिकरण उनके अधिकार अवसर और समानता का अधिकार होना अति आवश्यक है। ऐसा इसलिए ता की महिलाएं स्वतंत्र रूप से अपनी निर्णय ले सके और समाज में अपनी पूर्ण क्षमता के साथ भागीदारी निभा सके। 1908 से महिला सशक्तिकरण सामाजिक -राजनीतिक, शिक्षा – स्वास्थ्य,आर्थिक स्वतंत्रता यह कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। महिलाएं सबल और आत्मनिर्भर भी हो रही है। सरकार ने उनके सम्मान के लिए अनेकों कदम उठाए हैं। किंतु आज भी इसमें भारी कमी है। हम अभी भी पनप ही रहे हैं। हम महिलाओं को उनके सम्मान और अधिकार देने कई बार सोचने लगते हैं। शास्त्रसंगत बात है कि जहां स्त्रियों का सम्मान होता है वहां देवता का वास होता है। घर में सुख समृद्धि और शांति मिलती है।
भारत में महिलाओं की अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जहां स्त्रियों का मान सम्मान होता है वहां देवता का वास होता है। भारतीय संस्कृति एवं परंपरा में देखें तो स्त्री का विशेष स्थान सदियों से रहा है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अगर हम अपनी आकलन करते हैं तो पाते हैं कि महिलाओं को काफी सम्मान से देखे जाने के बाद भी दो भाग में विभक्त हैं । एक तरफ दबी कुचली अशिक्षित, घरेलू और पिछड़े महिलाएं और दूसरी तरफ प्रगति के पथ पर पढ़ी-लिखी अग्रसर महिलाएं जो कई मामलों में पुरुषों के मुकाबले काफी आगे निकल चुके हैं और अपनी नई कीर्ति स्थापित कर रही हैं। वहीं संस्था के सचिव राम रंजन सिंह ने कहा कि यदि हम सकारात्मक रूप से बात करते हैं तो आज की महिलाएं हर क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ रही हैं किंतु अब भी महिलाओं के उत्थान के लिए काफी कुछ किया जाना शेष है। घर के चौक चूल्हे से बाहर व्यवसाय हो, साहित्य जगत हो प्रशासनिक सेवा हो,विदेशी सेवा हो या फिर पुलिस विभाग हो या हवाई जहाज या फिर राजनीति के क्षेत्र । महिला अपने को हर जगह लोगों से अपनी लोहा मनवा रही है। अब महिलाएं राष्टो के राष्ट्रध्यक्ष भी हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह बातें निश्चय ही मन मस्तिष्क को संतोष पहुंचता है।
उन्हें अच्छी सलाह दे सकारात्मक सोच के साथ उसे आत्मनिर्भर होने का प्रेरणा दे। उन्होंने इस अवसर पर विश्व के समस्त महिलाओं को बधाई दी है।
संगठन सचिव संजय शुक्ला कोषाध्यक्ष श्री कैलाश झा ने अपने-अपने विचार रखें । महिला कॉलेज के प्राचार्या श्रीमती डॉक्टर सुशीला ने आयोजकों की भूरी भूरी प्रशंसा की।

शॉल ओढ़ाकर किया गया सम्मानित

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर श्री शाश्वत स्मृति व महिला पतंजलि योग समिति पाकुड़ द्वारा श्रीमती डॉक्टर सुशीला हंसदा प्राचार्या महिला कॉलेज पाकुड़, श्रीमती रूमा सिंह निदेशिका कलाकृति केंद्र, श्रीमती डॉली मित्रा, श्रीमती वंदना कुमारी श्रीमती मंजू देवी पाकुड़ को पुष्पगुच्छ एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

चित्रांकन प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष पर चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें ज्ञान निकेतन शिक्षण संस्थान, श्री गुरुदेव कोचिंग सेंटर, बाल विद्यापीठ, कलाकृति केंद्र, आदि के बच्चों ने भाग लिया जिसमें स्वीटी मुर्मू प्रथम स्थान, तानिया कुमारी द्वितीय, स्थान एवं सोनाली मरांडी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ जिन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

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