संथाल परगना की परंपराओं को मिली अलग पहचान, एसडीओ ने उपायुक्त व सरकार का जताया आभार
पाकुड़। झारखंड सरकार ने वर्ष 2026 के सरकारी कैलेंडर में आदिवासी समाज के महान पर्व सोहराय को उसका बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक सम्मान देते हुए लगातार तीन दिन—12, 13 और 14 जनवरी 2026—का राजकीय अवकाश घोषित किया है। यह फैसला न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संथाल परगना और पाकुड़ जिले की सांस्कृतिक अस्मिता को मान्यता देने वाला एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अब तक सोहराय पर्व को वह स्थान नहीं मिल सका था, जिसका वह हकदार था। वर्ष 2025 के सरकारी कैलेंडर में सोहराय के नाम से कोई पृथक अवकाश दर्ज नहीं था और इसे मकर संक्रांति के साथ जोड़कर देखा गया था। इससे आदिवासी समाज के बीच लंबे समय से असंतोष और उपेक्षा की भावना बनी हुई थी। वर्ष 2026 में झारखंड सरकार ने इस ऐतिहासिक चूक को सुधारते हुए सोहराय पर्व को उसकी स्वतंत्र सांस्कृतिक पहचान के साथ कैलेंडर में शामिल किया है।
उपायुक्त के मार्गदर्शन का दिखा असर
जानकारी के अनुसार, पाकुड़ जिले में उपायुक्त के मार्गदर्शन में जिस तिथि पर सोहराय पर्व का आयोजन किया गया था, उसी परंपरा और स्थानीय मान्यताओं को आधार बनाकर राज्य सरकार ने तीन दिवसीय अवकाश की घोषणा की है। यह निर्णय स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता और आदिवासी संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
संथाल परगना की परंपराओं को मिला न्याय
गौरतलब है कि कोल्हान प्रमंडल और छोटा नागपुर क्षेत्र में सोहराय (दीपावली) पर्व प्रायः नवंबर माह में मनाया जाता है, जबकि संथाल परगना में यह पर्व क्षेत्र विशेष के अनुसार जनवरी से फरवरी के बीच अलग-अलग तिथियों में मनाया जाता है। ऐसे में सरकार द्वारा संथाल परगना की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए जनवरी माह में सोहराय को अवकाश देना, स्थानीय संस्कृति और आदिवासी धर्म परंपरा के प्रति सम्मान का स्पष्ट संकेत है।
आदिवासी समाज में उत्साह और संतोष
सरकार के इस निर्णय से आदिवासी समाज में खुशी और संतोष की लहर दौड़ गई है। लोगों का कहना है कि यह फैसला केवल छुट्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और आत्मसम्मान को मजबूती प्रदान करता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे आदिवासी हित में ऐतिहासिक कदम बताया है।
एसडीओ साइमन मरांडी ने जताया आभार
अनुमंडल पदाधिकारी साइमन मरांडी ने इस निर्णय के लिए झारखंड सरकार तथा विशेष रूप से पाकुड़ के उपायुक्त महोदय के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि सोहराय को तीन दिवसीय अवकाश मिलना आने वाली पीढ़ियों के लिए सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश है। यह निर्णय आदिवासी पर्व-त्योहारों को सम्मान देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने आगे कहा कि सोहराय जैसे पारंपरिक पर्वों को सरकारी कैलेंडर में उचित स्थान मिलना, प्रशासन और समाज के बीच विश्वास को और मजबूत करेगा।
संस्कृति संरक्षण की दिशा में मजबूत पहल
कुल मिलाकर, झारखंड सरकार द्वारा सोहराय पर्व को तीन दिन का राजकीय अवकाश देना यह दर्शाता है कि राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था को गंभीरता से लिया जा रहा है। यह निर्णय न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए गर्व का विषय है, बल्कि आने वाले समय में अन्य पारंपरिक आदिवासी पर्वों को भी पहचान और सम्मान दिलाने की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा।
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