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May 15, 2026 1:13 pm

तिल सकरात पर डाल्टनगंज बाजार में चूड़ा–तिलकुट की रौनक

पत्रकार अंकित कुमार लाल

मेदिनीनगर: तिलसकरात के अवसर पर डाल्टनगंज बाजार में विशेष रौनक देखने को मिली। बाजार में विभिन्न प्रकार के चूड़े और तिलकुट आकर्षण का केंद्र बने रहे। तिलकुट के स्वरूप में गुड़, चीनी और खोवा से बने तिलकुट खूब बिकते नजर आए। इसके साथ ही बादाम पट्टी, आम पन्ना जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ भी लोगों की पसंद बनी रहीं।

शहर के तिलकुट की खासियत यह है कि इसका स्वाद बेहद अनोखा होता है। यह केवल स्वाद ही नहीं देता, बल्कि जुबान पर देर तक टिके रहने वाला अनुभव भी छोड़ जाता है। सादगी और स्वाद का यह मेल लोगों को बार-बार इसे खाने के लिए प्रेरित करता है।
तिल सकरात केवल पर्व नहीं, बल्कि रोजगार का अवसर भी लेकर आता है। लगभग 30 दिनों तक चलने वाले इस मौसम में तिलकुट बनाने, तोड़ने और बेचने से कई लोगों को अस्थायी रोजगार मिलता है। अनेक मजदूर और कारीगर इस समय अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद में इस काम से जुड़ जाते हैं, जिससे उनके घरों में पर्व से पहले ही खुशहाली आ जाती है। इस तरह सकरात केवल तिल और गुड़ का पर्व नहीं, बल्कि खुशियों और रोजगार का संगम भी है।

चूड़े की बात करें तो इस अवसर पर नया चूड़ा, पुराना चूड़ा और बेहद पतला चूड़ा बाजार में आसानी से उपलब्ध रहता है। लोग दही, दूध और गुड़ के साथ चूड़े का सेवन करते हैं। यह भोजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है। सुबह से लेकर शाम तक लोग इसी पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं और छतों पर पतंग उड़ाकर पर्व की खुशियाँ मनाते हैं।
संध्या बेला में घर-घर खिचड़ी बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। खिचड़ी में तिल, दाल, चावल और विभिन्न प्रकार की सब्जियों का प्रयोग किया जाता है। चौक-चौराहों पर भी सामूहिक रूप से इस पारंपरिक व्यंजन की खुशबू फैल जाती है, जो सकरात की सांस्कृतिक पहचान को और भी मजबूत करती है।

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