संवाददाता अंकित कुमार लाल
डालटेनगंज: नगर निगम क्षेत्र में जनता के टैक्स से बने दो प्रमुख सार्वजनिक स्थल—गांधी उद्यान और भीमराव अंबेडकर पार्क—इन दिनों असमान उपयोग और भेदभाव के आरोपों को लेकर चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां गांधी उद्यान में एंट्री फीस, मनोरंजन शुल्क और निजी कार्यक्रमों की अनुमति दी जा रही है, वहीं अंबेडकर पार्क को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
गांधी उद्यान में शुल्क और निजी आयोजन
गांधी उद्यान के सौंदर्यीकरण के बाद यहां प्रवेश शुल्क, झूले व अन्य गतिविधियों पर शुल्क तय किया गया। इसके साथ ही, अंदर बाहरी खाने-पीने की वस्तुएं ले जाने पर रोक है। समय-समय पर यहां निजी कार्यक्रम, लॉन्चिंग इवेंट और टिकट आधारित आयोजन (₹400–₹500) भी होते रहे हैं, जिससे आम जनता में नाराजगी बढ़ी है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब यह उद्यान जनता के टैक्स से बना है, तो गरीब और निम्न आय वर्ग के बच्चों को मुफ्त प्रवेश और समान सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं?
अंबेडकर पार्क की उपेक्षा
दूसरी ओर, भीमराव अंबेडकर पार्क में न तो बड़े कार्यक्रम होते हैं और न ही किसी प्रकार के उद्घाटन या लॉन्चिंग कार्यक्रम। यहां केवल सीमित गतिविधियां जैसे योग और बैठने की व्यवस्था ही देखने को मिलती है। जनता का आरोप है कि दोनों सार्वजनिक स्थलों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कई महापौर प्रत्याशियों ने इस व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा है कि टैक्स से बनी संपत्तियों पर निजी कार्यक्रम और शुल्क जनता के हितों के खिलाफ हैं। वहीं, जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि अब तक उप महापौर द्वारा किसी निजी कार्यक्रम या टैक्स संपत्ति के दुरुपयोग का मामला सामने नहीं आया, जबकि गांधी उद्यान में ऐसे आयोजन बार-बार देखे गए हैं।
जनता के सवाल
- क्या सार्वजनिक संपत्तियों पर निजी कार्यक्रमों की अनुमति उचित है?
- क्या गरीब और मध्यम वर्ग को सार्वजनिक स्थलों से दूर किया जा रहा है?
- क्या विकास के नाम पर असमानता बढ़ रही है?
इन सवालों के बीच नगर निगम की भूमिका और नीति पर अब जनता की नजरें टिकी हैं।





