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February 11, 2026 8:06 am

मेयर चुनाव नहीं, शहर की दिशा तय करने वाला जनादेश है



जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल

मेदिनीनगर: नगर निगम का महापौर चुनाव केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे शहर के आगामी पाँच वर्षों की दिशा और दशा तय करने वाला मार्गदर्शन होता है। यह चुनाव यह बताता है कि आने वाले समय में शहर विकास की राह पर आगे बढ़ेगा या फिर पुराने सवालों में उलझा रहेगा। पाँच वर्षों में बहुत कुछ बदला जा सकता है—शर्त सिर्फ़ सही नेतृत्व की होती है।
इस बार का चुनाव खास इसलिए भी है क्योंकि कई चेहरे केवल आवाज़ बुलंद करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कुछ प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिन्होंने ज़मीन पर उतरकर काम के ज़रिए अपनी दावेदारी मज़बूत की है।

प्रमुख दावेदारों की तस्वीर

सबसे पहले चर्चा में नाम आता है
प्रथम उपमहापौर राकेश कुमार सिंह उर्फ़ मंगल सिंह की धर्मपत्नी रिंकू सिंह का, जिन्होंने इस बार महापौर पद के लिए कदम बढ़ाकर चुनावी सरगर्मी को और तेज़ कर दिया है।
दूसरी ओर, वार्ड स्तर पर सक्रिय और काम के लिए पहचाने जाने वाले राजकुमार गुप्ता और जय श्री गुप्ता की जोड़ी भी चर्चा में है। अपने-अपने वार्डों में विकास कार्यों की छाप छोड़ने वाली जय श्री गुप्ता इस बार महापौर पद की मज़बूत दावेदार के रूप में उभर रही हैं।
तीसरा नाम है शीला श्रीवास्तव का, जिन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में लगातार काम किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि वे महापौर बनकर उन कार्यों को अंजाम देना चाहती हैं, जो अब तक अधूरे रह गए हैं।

चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प

सूत्रों के अनुसार, चुनावी तस्वीर अब पाँच प्रमुख चेहरों के बीच सिमटती दिख रही है।
जहाँ एक ओर रिंकू सिंह और चैनपुर क्षेत्र से मीना गुप्ता का मुकाबला अरुण शंकर से माना जा रहा है, वहीं जय श्री गुप्ता का संघर्ष भी काफ़ी रोचक होता जा रहा है।
इसी क्रम में पूर्व जिला परिषद सदस्य पूनम सिंह भी चुनावी मैदान में मज़बूती से खड़ी नज़र आ रही हैं।

शिक्षा के मुद्दे पर नम्रता त्रिपाठी की एंट्री

एक और अहम नाम है नम्रता त्रिपाठी, जो पूर्व मंत्री के. एन. त्रिपाठी की पुत्री हैं। उन्होंने शिक्षा को केंद्र में रखकर महापौर चुनाव में उतरने का निर्णय लिया है। के. एन. त्रिपाठी द्वारा समाजहित में किए गए कार्य—स्थानीय स्तर पर रोज़गार उपलब्ध कराना और ज़रूरतमंदों की मदद—आज भी लोगों के बीच चर्चा में हैं।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार नम्रता त्रिपाठी और अरुण शंकर के बीच सीधी टक्कर देखी जा सकती है।

जनता के सवाल और पूर्व महापौर पर चर्चा

चुनाव की गर्मी के बीच चाय दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक एक सवाल लगातार उठ रहा है—
क्या पूर्व महापौर को मिले अवसर का सही उपयोग हो पाया?
जनता की शिकायतें सामने आ रही हैं—नीलांबर-पीतांबर की प्रतिमाओं के आसपास रखरखाव, तालाबों की स्थिति, सड़क चौड़ीकरण के दौरान जाम और डिवाइडर निर्माण जैसे मुद्दों को लेकर असंतोष दिख रहा है।
हालाँकि सुंदरीकरण की कुछ झलक ज़रूर दिखी, लेकिन अपेक्षित स्तर पर काम न होने की बात आम चर्चा में है।

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