पाकुड़ जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ एमडीए–आईडीए अभियान 2026 का मंगलवार से विधिवत शुभारंभ हो गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों—हिरणपुर, अमड़ापाड़ा, पाकुड़िया, लिट्टीपाड़ा और महेशपुर—में सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों और डॉक्टरों ने खुद फाइलेरिया रोधी दवा खाकर लोगों को संदेश दिया कि यह दवा सुरक्षित है और बीमारी से बचाव का प्रभावी उपाय है। हिरणपुर प्रखंड के घाघरजानी और हाथकाठी गांव में दवा सेवन शिविर लगाया गया, जहां बच्चों सहित ग्रामीणों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई गई। शिविर का निरीक्षण बीडीओ दिलीप टुडू ने किया। अमड़ापाड़ा में फतेहपुर आंगनबाड़ी केंद्र से अभियान की शुरुआत हुई। यहां बीडीओ प्रमोद कुमार गुप्ता और सीएचसी प्रभारी डॉ. खालिद अहमद मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान 29 फरवरी तक चलेगा और बुधवार से स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगे। अमड़ापाड़ा प्रखंड में 80,879 लोगों को दवा देने का लक्ष्य रखा गया है। पाकुड़िया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीडीओ सोमनाथ बनर्जी ने खुद दवा खाकर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका समय पर दवा लेना है। लिट्टीपाड़ा में बीडीओ संजय कुमार और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकेश बेसरा ने डीईसी, एवरमेक्टिन और एल्बेंडाजोल का सेवन कर लोगों को जागरूक किया। महेशपुर सीएचसी में बीडीओ डॉ. सिद्धार्थ शंकर यादव, सीओ संजय कुमार सिन्हा और सीएचसी प्रभारी सुनील कुमार किस्कु ने फीता काटकर और दवा खाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि दवा को लेकर किसी भी भ्रम में न पड़ें। डॉक्टरों के अनुसार फाइलेरिया (हाथीपांव) मच्छरों से फैलने वाली गंभीर बीमारी है, जिसे समय पर और नियमित दवा सेवन से रोका जा सकता है। दवा खाली पेट न लेने की सलाह दी गई है। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन तभी संभव है, जब हर व्यक्ति अभियान में सहयोग करे और खुद दवा लेकर दूसरों को भी प्रेरित करे।












