कानूपुर के पास मिट्टी और मलबे का विशाल ढेर खदान में गिरा, मौतों की चर्चा के बीच अवैध खनन पर उठे गंभीर सवाल।
पाकुड़: मालपहाड़ी थाना क्षेत्र के कानूपुर गांव के समीप झारखंड-बंगाल बॉर्डर पर स्थित एक पत्थर खदान में सोमवार सुबह बड़ा हादसा होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि खदान के ऊपरी हिस्से पर जमा मिट्टी और मलबे का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा, जिसके कारण वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हादसे के समय खदान में करीब तीन से आठ मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान ऊपर से जमी हुई मिट्टी और चट्टाननुमा मलबे का बड़ा ढेर नीचे गिर गया। घटना के बाद कई मजदूरों के दबने और तीन से पांच मजदूरों की मौत की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित खदान में लंबे समय से अवैध खनन का कार्य किया जा रहा था। ग्रामीणों ने कहा कि झारखंड की सीमा से सटे इस क्षेत्र में चल रहे खनन की सूचना कई बार जिला प्रशासन को दी गई, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण इस तरह की गंभीर घटना सामने आई है। इधर, खदान प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि खदान बंगाल क्षेत्र में स्थित है और जहां मिट्टी का ढेर गिरा, वह हिस्सा भी बंगाल की सीमा में आता है। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय सूत्रों का दावा है कि खनन झारखंड की जमीन पर हो रहा था और दुर्घटना भी झारखंड क्षेत्र में ही हुई है। ऐसे में घटना स्थल की वास्तविक स्थिति और सीमा निर्धारण अब जांच का विषय बन गया है। घटना के बाद खदान प्रबंधन पर गंभीर आरोप भी लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद खदान में लगे बड़े मशीनों से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया और शवों को वहां से जल्दबाजी में हटाया गया। इसके बाद शवों को कहां ले जाया गया, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी जिला प्रशासन के निर्देश पर टास्क फोर्स की टीम द्वारा उक्त क्षेत्र का निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई थी। बावजूद इसके यदि वहां खनन कार्य जारी था, तो यह प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। यदि मजदूरों की मौत की आशंका सही साबित होती है, तो यह न केवल एक बड़ा खनन हादसा होगा, बल्कि अवैध खनन और प्रशासनिक उदासीनता का भी गंभीर उदाहरण माना जाएगा। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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