पाकुड़। रथ मेला मैदान में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय संतमत सत्संग का रविवार को श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में भव्य समापन हो गया। समापन सत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता सत्यप्रकाश बाबा ने अपने ओजस्वी और सारगर्भित प्रवचनों से उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया। अपने संबोधन में सत्यप्रकाश बाबा ने भौतिक सुख-सुविधाओं की निस्सारता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवनभर पद, प्रतिष्ठा और संपत्ति के पीछे भागता रहता है, लेकिन वास्तविक शांति केवल परमात्मा की भक्ति और आत्मज्ञान में ही निहित है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और महाराज चित्रकेतु के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि यह संसार एक मायावी जगत है, जहाँ सुख का आभास तो होता है, परंतु स्थायी संतोष नहीं मिलता। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अज्ञानवश मनुष्य अंत समय तक सांसारिक मोह-माया में उलझा रहता है। प्रवचन के दौरान एक बालक द्वारा विश्व का मानचित्र जोड़ने की प्रेरक कथा सुनाते हुए उन्होंने संदेश दिया कि यदि व्यक्ति स्वयं को सुधार ले, तो समाज और संसार स्वतः सुधर जाएगा।
सत्यप्रकाश बाबा ने यह भी कहा कि परमात्मा और सद्गुरु में कोई भेद नहीं है और जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी शरण में रहता है, उसका जीवन कभी रिक्त नहीं रहता। सत्संग के अंतिम दिन जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और विशाल भंडारे के साथ हुआ। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य एवं कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।








