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April 15, 2026 3:15 am

बैसाखी की धूम: गुरुद्वारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, कीर्तन-लंगर से गूंजा माहौल।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष सबरी पाल का सम्मान, बैसाखी पर एकता और विकास का संदेश

पाकुड़: बैसाखी पर्व के अवसर पर मंगलवार को शहर में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला। गुरु साध संगत पाकुड़ गुरुद्वारे में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सिख और सिंधी समाज के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह से ही गुरुद्वारे में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। दिनभर गुरुबाणी, कीर्तन, पाठ और अरदास का आयोजन किया गया। बाहर से आए रागी जत्था ने भक्ति गीतों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं भाई नवनीत सिंह के कीर्तन ने माहौल को और अधिक भावुक बना दिया। अरदास के बाद प्रसाद वितरण किया गया और परंपरा के अनुसार सभी श्रद्धालुओं ने पंक्ति में बैठकर लंगर ग्रहण किया। गुरुद्वारा परिसर में सेवा, एकता और भाईचारे का सुंदर दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर गुरुद्वारा कमिटी की ओर से नवनिर्वाचित अध्यक्ष सबरी पाल को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। सबरी पाल ने सभी को बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनता के सहयोग से क्षेत्र के विकास के लिए किए गए वादों को हर हाल में पूरा किया जाएगा। गुरुद्वारा कमिटी के कोषाध्यक्ष कुलदीप सिंह ने बताया कि बैसाखी पंजाबियों का प्रमुख त्योहार है, आज के दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी एवं नई फसल की खुशी और समृद्धि का प्रतीक है बैसाखी।

बैसाखी का महत्व।

बैसाखी का पर्व फसल कटाई की खुशी के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1699 में सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। यही कारण है कि यह दिन सिख समुदाय के लिए आस्था और गर्व का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष अरदास, कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है। लोग नए वस्त्र पहनकर ढोल-नगाड़ों के साथ भांगड़ा-गिद्धा कर खुशियां मनाते हैं।
बैसाखी न केवल खुशहाली का प्रतीक है, बल्कि यह एकता, सेवा और नई शुरुआत का भी संदेश देता है।

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