पाकुड़। विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना के साथ सोमवार से गणेश उत्सव का शुभारंभ होगा। पाकुड़ जिले के विभिन्न प्रखंडों में गणेश पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। पाकुड़ रेलवे स्टेशन परिसर सहित हिरणपुर, अमड़ापाड़ा, पाकुड़िया और महेशपुर समेत कई स्थानों पर गणपति की भव्य प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूजा पंडालों में गूंजने वाला ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष वातावरण को भक्तिमय बनाएगा।
सनातन परंपरा में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, अनुष्ठान या धार्मिक आयोजन की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से करने की परंपरा रही है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न होता है। इसी कारण उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति भी कहा जाता है। गणेश पूजा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि नई शुरुआत, शुभ संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी मानी जाती है। भक्त भगवान गणेश से सुख, समृद्धि, बुद्धि और परिवार के मंगल की कामना करते हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों और पूजा पंडालों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। पाकुड़ में गणेश उत्सव की अपनी अलग ही रौनक देखने को मिलती है। विभिन्न पूजा समितियों की ओर से आकर्षक पंडाल, विद्युत सज्जा और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां की गई हैं। शाम होते ही पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने और भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय होने की उम्मीद है। गणेश उत्सव का संदेश भी यही है कि हर शुभ शुरुआत विश्वास, सद्भाव और मंगलकामना के साथ हो। प्रथम पूज्य गणपति के आगमन के साथ पाकुड़ में उत्सवों के नए दौर की शुरुआत होगी और शहर से गांव तक ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से वातावरण गूंज उठेगा।





