::–पता नहीं पाकुड़ के पत्थर उद्योग क्षेत्र में किसकी लगी नजर
पाकुड़: झारखंड का पाकुड़ जिला पत्थर उद्योग के लिए प्रसिद्ध है.जमीनी एवं व्यवहारिक क्षेत्रीय सच्चाई को अगर देखा जाय तो सौ साल को पार कर चुके इस पत्थर उद्योग ने एशिया स्तर पर न सिर्फ पाकुड़ को पहचान दिलाई बल्कि इस उद्योग ने यहां के प्रत्यक्ष रूप से हजारों एवं पश्चिम बंगाल सहित आसपास के इलाकों को भी जोड़ लिया जाय तथा पत्थर से सम्पर्ति अन्य व्यवसाय को भी साथ लिया जाय तो लाखों की संख्या में लोगों को रोजगार मुहैया कराया है. कुछ ही महीने पहले अवैध खनन व परिवहन को लें जिला प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई में अवैध नाम की गाथा को समाप्त कर दी गई है।पाकुड़ जिले के उपायुक्त व जिला टास्क फोर्स के टीम के द्वारा लगातार कार्यवाही के बाद खनन क्षेत्र आईना की तरह साफ हो चुका है।वर्तमान समय में सभी क्रैशर व खदान सरकार व विभागीय निर्देशों का अनुपालन करते हुए कार्य कर रही है।भले ही जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद जिले में पत्थर उद्योग अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है लेकिन कार्रवाई के बाद अवैध कारोबारियों में जिला प्रशासन के कार्यवाही का खौफ साफ नजर आ रहा है।जिसके चलते अवैध कारोबार में अंकुश लगा हुआ है।हां वैध हो या अवैध पाकुड़ के मजदूरों के लिए दुख की बात है क्योंकि उनके समक्ष रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है।बिना वैध कागजों के पत्थर खदान और क्रेशरों का संचालन करने पर जिला प्रशासन की कड़ी कार्रवाई भी हुई है.इसके कारण काफी संख्या में अवैध पत्थर खदान और क्रेशर बंद हो गये हैं. वहीं, वैध खदान और क्रेशर भी कागजातों के अभाव के कारण संचालित नहीं हो रहे हैं. इसके अलावा कागजातों को पूर्ण करना भी विभागीय शिथिलता के कारण समय पर नहीं हो पाता है. जिसके कारण पत्थर व्यवसायियों के समक्ष भीषण संकट उत्पन्न हो गया है. वहीं, इसका खासा असर मजदूरों पर देखने को मिल रहा है.
कार्रवाई से पुर्व जिले में 300 पत्थर खदान और 500 क्रेशर थे संचालित
बता दें कि पहले जिले में 300 के करीब पत्थर खदान और 500 के करीब क्रेशर संचालित हुआ करते थे, लेकिन कोरोना महामारी और उसके बाद ईडी की कार्रवाई के बाद से जिले में पत्थर उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है. वर्तमान में करीब 86 पत्थर खदान वैध है. जिसमें से मात्र 72 पत्थर खदान में ही काम हो रहा है. वहीं, जिले में 245 पत्थर क्रेशर प्लांट को लाइसेंस दिया गया है.जिसमें से 100 से कम ही क्रेशर संचालित हो रहा है. जिससे कारोबारियों के साथ-साथ मजदूरों के समक्ष भी रोजी-रोजगार का भीषण संकट उठ खड़ा हो गया है.सबको रोजगार मिलता था, लेकिन अब बहुत दिक्कत है.लोगों को काम करने के लिए दूसरे राज्य जाना पड़ रहा है.
इन दिनों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कुछ नावीश व विपक्षी लोगों की काली नजर इन पत्थर उद्योग क्षेत्रों में पड़ी हुई है।वे अपने आपसी भड़ास को निकालने के लिए जिला प्रशासन का सहारा लेकर पत्थर उद्योग से छेड़छाड़ करने में लगे हैं।उन नावीश व विपक्षी लोगों की मनसा खुद को विकसित करना है।लेकिन जिला प्रशासन की बात करें तो उनकी सकारत्मक मंशा पाकुड़ जिले के बेरोजगारों को रोजगार दिलाने की है।इन दिनों एक तरफ जहां अवैध कारोबारियों में रोष व्याप्त है वहीं वैध कारोबारियों में जिला प्रशासन की कार्रवाई संजीवनी साबित हुई है.









