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January 24, 2026 1:13 pm

एक्सप्लेनर – चुनाव मालदीव में लेकिन उसमें भारत-चीन की साख दांव पर क्यों

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मालदीव हिंद महासागर में भारत के लक्ष्यद्वीप के नीचे 1200 द्वीपों का देश है. वैसे तो आकार में यह दक्षिण एशिया का बहुत छोटा देश है, लेकिन इसका हिंद माहासागर में बहुत अधिक रणनीतिक महत्व है. पिछले कुछ सालों से चीन ने हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और उसकी प्रतिक्रिया में भारत ने भी यहां अमेरिका के साथ मिल क्वाड समूह बनाया है, मालदीव का अंतररष्ट्रीय महत्व बढ़ गया है. मालदीव में 30 सितंबर को राष्ट्रपति का चुनाव होना है और जहां जीतने वाला उम्मीदवार भारत या चीन में से किसे ज्यादा तरजीह देगा यह बहुत मायने रखता है.

दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
शनिवार को मालदीव मे होने वाले चुनाव में मुकाबला वर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और विपक्षी उम्मीदवार मोहम्मद मुइजू के बीच है. जिस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात हैं उसे देखते हुए भारत और चीन दोनों का ही प्रयास मालदीव से अपने संबंध बेहतर करने में है. वहीं दोनों उम्मीदवारों में से को भारत की ओर तो दूसरे को चीन की ओर झुकाव रखने वाला माना जा रहा है.

एक भारत और एक चीन की ओर
इसके एक बड़ी वजह यह है कि मालदीव दुनिया के मालवाहक जहाजों के हिंद महासागर के रास्ते के बीच में पड़ने वाला देश है. ऐसे में भारत और चीन की इस देश के चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी देखने को मिल रही है. मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार सोलिह 2018 में विजयी रहे थे, के भारत से अच्छे संबंध माने जाते है, जबकि प्रोग्रेसिव अलायंस के उम्मीदवार म्युजू के चीन से बेहतर संबंध हैं.

भारत और चीन
मालदीव का भारत के साथ सौहार्दपूर्णसंबंधों का पुराना इतिहास रहा है. वह लंबे समय से भारत के प्रभाव में रहा है. वहां भारत की उपस्थिति हिंद महासागर में हमें निगरानी की एक अतिरिक्त क्षमता प्रदान करती है. लेकिन चीन ने हिंद महासागर मे अपनी नौसैन्य उपस्थिति बढ़ाई है और वह यहां रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी पहुंच हासिल करना चाहता है जिसमें मालदीव के आसपास का क्षेत्र खासे महत्व का है.

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मालदीव के साथ अच्छे संबंध भारत और चीन दोनों के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

चीन का काफी कुछ दाव पर?
हाल में चीन के खाड़ी देशों से नजदीकियों के कारण उसके मालवाहक जहाजों की इन देशों में आवाजाही हिंद महासागर से होने से चीन के लिए मालदीव का महत्व बढ़ गया है. ऐसे में मालदीव उन देशों में शामिल हो गया है जिन्हें चीन अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करना चाहता है. इस तरह का प्रयास उसने श्रीलंका को आर्थिक मदद देकर किया था. चीन ने मालदीव को करोड़ों डॉलर का ऋण दे चुका है. ऐसे में इस चुनाव में चीन का काफी कुछ दाव पर लगा है.

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क्या भारत का पक्ष कमजोर है?
इसी महीने केशुरु में हुए इस चुनाव को पहले चरण में सोलिह को केवल 39 फीसदी वोट मिले थे. हाल में सोलिह को पहले भारत की नीति की आलोचना का सामना करना पड़ा था. इसमें कहा गया था कि सोलिह ने चीन की कीमत पर भारत से संबंध मजबूत किए हैं. लेकिन बीबीसी रिपोर्ट के मुताबिक सोलिह इस आरोप का खारिज करते हुए कहते हैं कि उन्होंने एक देश के संबंध दूसरे की संबंधों की कीमत पर कभी नहीं बनाए ना ही इस तरह का नजरिया रखा.

भारत के खिलाफ?
भारत के खिलाफ भावनाएं पनपने का कारण भारत के मालदीव को 2013 में दिए गए दो हेलीकॉप्टर और 2020 में एक छोटा विमान दिया था. भारत का कहना था कि यह विमान बचाव कार्यों और चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिए दिया गया है, बकि 2021 में मालदीव सेना ने कहा था कि 75 भारतीय सैनिक उनके देश में काम कर रहे हैं. धीरे धीरे मालदीव से भारतीयों को बाहर करने की मांग ने जोर पकड़ लिया जिसमें विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इससे मालदीव की सुरक्षा से समझौता हो रहा है. यह अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है.

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वर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को भारत का पक्ष लेने वाला राष्ट्रपति माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

चीन की ओर कब झुका मालदीव
2013 से 2018 के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति रहने अब्दुला यामीन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिन के साथ उनके महत्वकाक्षी रोड एंड बेल्ट इनीशिएटिव के साथ जुड़ने का समझौता किया था. उस दौर में भारत औरपश्चिमी देश यामीन को मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के चलते कर्ज नहीं दे रहे थे जिससे यामीन ने चीन की ओर रुख किया. यामीन अभी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं और म्युजू को यामीन का ही प्रॉक्सी उम्मीदवार माना जा रहा है.

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साफ है कि यामीन के भारत से कटु संबंध होने की वजह से चीन सोलिह के खिलाफ उम्मीदवार का ही समर्थन करेगा. भारत ने हाल ही में चीन के मालदीव को दिए कर्ज की बराबरी करने का प्रयास किया है और अब तक दो अरब डॉलर दिए हैं. मालदीव मे कई लोगो भारत की नियत पर संदेह करते हैं. कई लोगों का मानना है कि मालदीव को भारत सहित किसी भी देश से रणनीतिक संबंध नहीं बनाने चाहिए. वर्तमान चुनाव सोलिह के लिए कठिनाई भरा माना जा रहा है क्योंकि वे छोटे दलों को अपने साथ लाने में सफल नहीं रहे हैं. इस चुनाव के नतीजे  हिंद महासागर में वर्चस्व की लड़ाई को एक निर्णायक मोड़ जरूर देंगे.

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