पाकुड़। शहर की बहुप्रतीक्षित शहरी जलापूर्ति योजना एक बार फिर तारीखों के जाल में उलझ गई है। 2013 में स्वीकृत और 2017 में पूरा होने वाली यह योजना 12 साल बीत जाने के बाद भी अधूरी है। हर साल मिलने वाला नया आश्वासन अब 2026 पर जाकर टिक गया है—वादा है कि इस बार मार्च 2026 में गंगाजल पाकुड़ के घरों तक जरूर पहुँचेगा। सवाल है—इस बार जल आएगा या फिर एक नई तारीख का ऐलान होगा?
2013 में स्वीकृति, 2017 में पूरा होना था काम
झारखंड सरकार के नगर विकास विभाग ने 2013 में पोठीमारी गंगा से पाकुड़ तक 54 किमी पाइपलाइन से जलापूर्ति की योजना को मंजूरी दी थी। लक्ष्य था—2017 तक शहर को गंगाजल मुहैया कराना। लेकिन यह लक्ष्य आज तक कागजों और तिथियों के बीच ही घूमता रहा।
दो एजेंसियों ने बीच में छोड़ा काम, योजना अधर में
शहरी जलापूर्ति योजना का ठेका पहले दो अलग-अलग एजेंसियों को दिया गया था। दोनों ने काम शुरू तो किया, लेकिन बीच में ही प्रोजेक्ट छोड़ दिया। नतीजा—सरकारी महात्वाकांक्षा धूल खाती रही और शहर इंतजार करता रहा।
7.5 किमी शेष कार्य अब तीसरी एजेंसी के जिम्मे
54 किमी में से अब सिर्फ 7.5 किमी पाइपलाइन लगाना बाकी है। इस शेष कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी गणपति बोरवेल, रांची को सौंपी गई है। यह काम लगभग 4.50 करोड़ की लागत से पूरा किया जाएगा।
नगर परिषद शहर की गलियों और मोहल्लों में अतिरिक्त पाइपलाइन डालने का अलग से काम करेगी।
30 दिसंबर तक पाइप बिछाने का लक्ष्य, मार्च 2026 में जलापूर्ति की उम्मीद
एजेंसी को 30 दिसंबर 2025 तक 7.5 किमी पाइपलाइन का काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद एक माह तक ट्रायल रन चलेगा। सब कुछ ठीक रहा तो मार्च 2026 के अंत तक पाकुड़ के घरों में गंगाजल पहुँचने की बात कही जा रही है—12 साल बाद।
सिंधीपाड़ा और रेलवे कॉलोनी अब भी स्टार्टअप
रेलवे विभाग की स्वीकृति न मिलने के कारण सिंधीपाड़ा और रेलवे कॉलोनी के आसपास के क्षेत्रों में इस योजना का लाभ फिलहाल नहीं पहुँच पाएगा। ये क्षेत्र फिर भी इंतजार की कतार में ही रह जाएंगे। बीपीएल को फ्री पानी, अन्य को 7000 जमा कर मीटर से जल, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि बीपीएल परिवारों को पानी निशुल्क मिलेगा। अन्य उपभोक्ताओं को कनेक्शन के लिए 7000 रुपये जमा करने होंगे। मीटर आधारित जलापूर्ति होगी, जिसमें 1000 लीटर पानी पर 7 रुपये शुल्क लगेगा।







