जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल
पलामू: पूरा चुनाव संघर्ष के साथ लड़ने वाले अशोक ओझा को इस बार जीत नहीं मिली, लेकिन उनका सवाल अब भी जिंदा है। चुनाव के दौरान यह चर्चा आम थी कि प्रत्याशी के रूप में उनके पास सोच, क्षमता और विकास की योजना की कोई कमी नहीं थी।
जनता ने जो फैसला दिया, वह सिर-माथे, लेकिन अब अशोक ओझा ने वार्ड संख्या 8 की जनता के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जो आने वाले समय में राजनीति की असल तस्वीर दिखाएगा।
“वार्ड 8 में 10 लाख रुपये से विकास की शुरुआत जरूर हुई है,*लेकिन सवाल यह है कि यह विकास वार्ड का हो रहा है या पार्षद का?”
आज वार्ड की गलियों में यही चर्चा है—
क्या यह पैसा सच में सड़क, नाली, रोशनी और जनता की जरूरतों पर खर्च होगा।
या फिर यह सिर्फ राजनीतिक दिखावा और कुर्सी मजबूत करने का जरिया बन जाएगा?
राजनीति में अक्सर शुरुआत बड़ी-बड़ी घोषणाओं से होती है,
लेकिन असली सच 5 साल बाद सामने आता है।
समय गवाह है—
आने वाले वर्षों में यह साफ हो जाएगा कि सबसे ज्यादा विकास किसका हुआ:
वार्ड की जनता का
कुर्सी और पद पर बैठे लोगों का
अब जिम्मेदारी सिर्फ नेताओं की नहीं,
वार्ड 8 की जागरूक जनता की भी है कि वह हर काम पर नजर रखे, सवाल पूछे और सच को सामने लाए।
क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक होती है,
और नेता सिर्फ सेवक।









