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February 11, 2026 4:52 am

कुशल शिल्पी थे शिक्षाविद राजेन्द्र बाबू



– ख्यातिप्राप्त शिक्षाविद व रचनाकार राजेन्द्र नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर स्मृतिसभा।

गोड्डा : शिक्षाविद, कवि शिरोमणी, साहित्यकार सह त्रिवेणी स्मारक उच्च विद्यालय, महेशपुर (बसंतराय) के प्रख्यात हिंंदी शिक्षक राजेन्द्र नारायण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर विद्यापति सांस्कृतिक परिषद के सभागार में स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। वहीं समाज के पांच शिक्षाविदों व समाजसेवी हरिशंकर मिश्र, प्रो० किरण चौधरी, सुबोध झा, सुभाष चंद्र मिश्र एवं अखिल कुमार झा को अंग वस्त्र, साहित्यिक पुस्तक, डायरी, कलम भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राजेन्द्र बाबू के चित्र पर माल्यार्पण व बारी- बारी से श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला कालेज की सेवा निवृत्त प्राचार्या प्रो० किरण चौधरी ने किया जबकि संचालन विभिन्न खेल संघों के सचिव सुरजीत झा द्वारा किया गया। वहीं अमरेन्द्र सिंह “बिट्टू” व अखिल कुमार झा ने रघुपति राघव राजा राम… भजन गाकर कार्यक्रम का आगाज किया।
इस दौरान श्रमजीवी सेवा ट्रस्ट महेशपुर के सचिव नवीन कुमार झा ने कहा कि राजेन्द्र बाबू एक योग्य शिक्षक थे। उनकी अनूठी शिक्षण शैली की बदौलत ही छात्र व अभिभावक उनके कायल थे। तत्कालीन ख्यातिप्राप्त साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी शुद्ध्देव झा उत्पल व प्रधानाध्यापक केदार झा के सान्निध्य में 1965 में त्रिवेणी स्मारक विद्यालय, महेशपुर में उन्होंने बतौर हिंदी शिक्षक योगदान किए। वे 1990 तक विद्यालय में पदस्थापित रहे वे कुशल शिल्पी थे। इस काल खंड में क्षेत्र के दर्जनों छात्र-छात्राओं ने उनके अनुशासन की छांव में पढ़कर सफलता का परचम लहाराया। उनके शिष्य आज भी देश के कोने- कोने में उच्च अधिकारी बनकर उनकी शान में चार चांद लगा रहे हैं। ऐसे योग्य शिक्षक का पूरा समाज ऋणी है। उनका कर्ज इस जन्म में नहीं उतारा जा सकता है।
इसी क्रम में आदर्श शिक्षक दिलीप कुमार झा ने स्व० राजेन्द्र नारायण सिंह को एक आदर्श शिक्षक बताया। कहा कि उनकी रचनाओं में रसधार, धुआं, यह किसकी हार थी, चिता, मुस्कान, मुसाफिर, अर्थ, शेषपूर्ण, भाव, मायावश, इच्छा, अनुगूंज, गूंज, नजरिया, दूत, बदरिया, प्रतिक्षा, संसार, शाम, चेतना, बचपन, भगवीन, राम बंधन, मेरी सून, चाहत, संगिनी, संबंध, बिरहातुर, अखंड, मजधार, सृष्टि, शाहिल का प्रकाशन उनके जेष्ठ पुत्र डॉ० शिशिर कुमार सिंह एडीएम स्तर के वरीय पदाधिकारी द्वारा कराया जा रहा है। शीघ्र ही इसका विमाचन होगा। इसके अलावा सेवा निवृत्त बीडीओ परमानंद चौधरी, राजेश झा, डॉ० वंशीधर मिश्र, दिवाकांत झा, निश्चल ठाकुर, वीरकुंवर सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य ध्रुव सिंह, सर्वजीत झा, योगेश चंद्र झाआदि ने भी विचार व्यक्त किए। मौके पर दर्जनों गणमान्य उपस्थित थे।

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