सतनाम सिंह
पाकुड़: सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल की जयंती एवं सिंधी नववर्ष ‘चेटीचंड’ के अवसर पर शहर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सेठ हिरदूमल गुरुद्वारे में आयोजित समारोह में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत विशेष भजन-कीर्तन और शब्द वाणी से हुई, जिससे पूरा गुरुद्वारा भक्तिमय माहौल में डूब गया। श्रद्धालुओं ने माथा टेककर भगवान झूलेलाल से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की तथा एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई दी। इस दौरान डांडिया नृत्य और विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। शाम को भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा सेठ हिरदूमल गुरुद्वारे से शुरू होकर माता मंदिर और जैन मंदिर होते हुए नगर भ्रमण पर निकली। पूरे रास्ते श्रद्धालु भक्ति गीतों और कीर्तन के साथ झूमते नजर आए। नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा पुनः गुरुद्वारे पहुंचकर संपन्न हुई। इस मौके पर समाज के वरिष्ठ सदस्य विनोद तीर्थानी ने बताया कि भगवान झूलेलाल सिंधी समुदाय के आराध्य देव हैं, जिन्हें जल देवता वरुण का अवतार माना जाता है। उन्होंने ‘ईश्वर एक है’ का संदेश देकर समाज में एकता, प्रेम और सद्भाव का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि चेटीचंड का पर्व सिंधी नववर्ष का प्रतीक है, जो हर वर्ष चैत्र शुक्ल द्वितीया को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कार्यक्रम में संजय खत्री, दिनेश लखमणि, किशोर लखमानी, विनोद तीर्थानी, प्रेमचंद गंगवानी, गौतम बिजलानी, राहुल बेलानी सहित सिंधी समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे आयोजन और भी आकर्षक बन गया।











