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April 6, 2026 11:57 pm

संघर्ष से सम्मान तक, जेएसएलपीएस के सहारे बीटीधन हेम्ब्रम ने बदली अपनी तकदीर।

एस कुमार

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ने के बाद महेशपुर प्रखंड के पोखरिया गांव की महिलाओं की तस्वीर बदल गई है. जहां रोजगार के अभाव में महिलाएं व पुरुषों का पलायन ओर हड़िया बेचने की हालत थी. लेकिन अब महिलाएं किराना दुकान चला खुशहाल जिंदगी जी रही है. महेशपुर प्रखंड के पोखरिया गांव में आजीविका का मुख्य साधन कृषि है. लेकिन यहां कोयले की धूल से गांव सहित पूरे आसपास के गांव कोयले की धूल के बीचों बीच रहकर भी पोखरिया गांव निवासी बीटीधन हेम्ब्रम ने जेएसएलपीएस समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी है. वही पोखरिया गांव के बीटीधन हेम्ब्रम (29) पति देना मुर्मू और अपने तीन छोटे बच्चों के साथ रहती है. उनका छोटा सा घर कोयले वाली सड़क के बिल्कुल पास है. उसके पति दिहाड़ी मज़दूर के तौर पर काम करते थे, और इस इलाके के कई दूसरे मज़दूरों की तरह उनका काम भी अनियमित था. कुछ दिन उन्हें काम मिल जाता है, तो कुछ दिन वे खाली हाथ घर लौटते थे. इसी बीच घर का खर्च चलाना और तीन बच्चों की परवरिश करना बीटीधन हेंब्रम के लिए आसान नहीं था. ज़मीन बहुत कम होने और आसपास आजीविका के लगभग कोई अवसर न होने के कारण, बीटीधन हेंब्रम अपने परिवार का सहारा बनने का दबाव महसूस होने लगा. ग्रामीण इलाकों की कई दूसरी महिलाओं की तरह, जो आमदनी के तुरंत मिलने वाले ज़रियें की तलाश में जूझती हैं. उसने भी आखिरकार बाजार, एवं चौक चौराहे पर ही देसी हंडिया बनाना और बेचना शुरू कर दिया. वह इसे आसपास की हाटों और गाँव के चौराहों पर बेचती थी, जहाँ उसे आसानी से ग्राहक मिल जाते थे. हालांकि इस काम से उसे रोज़ाना थोड़ी-बहुत आमदनी हो जाती थी, लेकिन यह वह ज़िंदगी बिल्कुल नहीं थी जो वह सचमुच जीना चाहती थी. इस काम से आसपास का माहौल भी ठीक नहीं था, और अपने मन की गहराइयों में वह हमेशा एक बेहतर और ज़्यादा इज़्ज़तदार तरीके से जीना चाहती थी. वही बीटीघन हेंब्रम ने झारखंड सरकार के महत्वाकांक्षी योजना ” फूलों झानों आशीर्वाद अभियान ” इस योजना के तहत उन्हें विगत 2024 में जेएसएलपीएस की आर्थिक सहयोग एवं द. नुडजी संस्था के तकनीकी सहयोग से 25 हजार की ब्याज मुक्त राशि मिली. जिससे उन्होंने नाश्ता की दुकान रोड के किनारे में खोली. दुकान अब काफी अच्छे तरीके से चल रहा है, और हर दिन लगभग 700 से 800 तक का मुनाफा हो जाता है. इस कार्य में उनके पति भी काफी सहयोग करते है. पहले के तुलना में बीटीघन हेंब्रम का परिवार काफी खुश है और वह फूलों झानो से जुड़कर बहुत खुश है. बीटीघन हेंब्रम ने इस सफलता का श्रेय जेएसएलपीएस संस्था को दी है. जिनके माध्यम से ब्याज मुक्त राशि मिली और आज वे सशक्त महिला बन गई है. वही बीटीघन हेंब्रम ने अगले आजीविका के रूप में मुर्गी पालन को बढ़ावा देना चाह रही है.

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