पाकुड़: जिले में सात दिवसीय श्री श्री 1008 महारुद्र यज्ञ समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान रविवार को राम-जानकी विवाह और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। कथा में बताया गया कि श्री राम के जन्म के बाद विश्वामित्र मुनि राजा दशरथ के पास पहुंचे और श्री राम व लक्ष्मण को लेकर जंगल की ओर प्रस्थान किया। कथा में प्रमुख प्रसंग में मिथिला नरेश के घर माता जानकी के स्वयंवर का वर्णन हुआ। स्वयंवर में जाने के लिए शिव का धनुष रखा गया था, जिसे तोड़कर ही कोई भी महारथी माता जानकी से विवाह कर सकता था। विश्वामित्र मुनि के नेतृत्व में राम और लक्ष्मण स्वयंवर में पहुंचे। जैसे ही श्री राम ने धनुष उठाया, वह सहज ही टूट गया और इसी के साथ राम-जानकी विवाह उत्सव की शुरुआत हुई। विवाह में माता जानकी का कन्यादान यज्ञ समिति के अध्यक्ष मुकेश सिंह द्वारा किया गया। पूरे समारोह में विवाह गीत गाए गए और उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा के अगले चरण में जब श्रीकृष्ण के जन्म का वर्णन हुआ, तो माहौल उत्सव में बदल गया। भजन “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” पर श्रद्धालु झूम उठे। बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की झांकी सजाई गई और माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया।।समिति के 17वें वार्षिक इस अनुष्ठान में मथुरा से आए कथावाचक पंकज शरण जी महाराज ने राम जन्मोत्सव और राम-जानकी विवाह के प्रसंग का जीवंत वर्णन करते हुए बताया कि कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम का जीवन समाज के लिए आदर्श है। पूरे पंडाल में ‘जय श्री राम’ के जयकारों से माहौल भक्तिभाव से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर और भव्य रस्मों का साक्षात्कार कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।







