जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल
मेदिनीनगर:शहर के जाने-माने समाजसेवी और सभी के प्रिय ‘नवल भैया’ के निधन से पूरे शहर में शोक की लहर है। उनके जाने से न सिर्फ एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व का अंत हुआ है, बल्कि अनगिनत लोगों ने अपना एक अभिभावक, एक सच्चा शुभचिंतक भी खो दिया है।
इसी क्रम में पंकज श्रीवास्तव ने बेहद भावुक शब्दों में उन्हें याद करते हुए कहा—
“मैंने अपना बड़ा भाई खो दिया… अब इस शहर में कोई नहीं रहा, जो बिना वजह हालचाल पूछे।”
उन्होंने बताया कि नवल भैया का स्नेह और अपनापन ऐसा था, जो हर परिस्थिति में साथ निभाता था। “जरूरत पड़ने पर तो हर कोई पूछता है, लेकिन भैया बिना किसी कारण भी फोन कर पूछते थे—कहाँ हो, क्या कर रहे हो, कब आओगे,” उन्होंने भावुक होकर कहा।
पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि अगर दो-तीन दिन तक भैया का फोन नहीं आता, तो घर में भी इसकी चर्चा होने लगती थी। यहां तक कि उनकी पत्नी भी पूछ बैठती थीं कि “भैया शहर में नहीं हैं क्या?”
उन्होंने बताया कि जब भी वे शहर से बाहर जाते, नवल भैया को जरूर सूचित करते थे, लेकिन इसके बावजूद भैया हर दो-तीन दिन पर फोन कर उनकी कुशलक्षेम जान लेते थे। “वो कहते थे—बस यह जानना चाहता हूं कि सब ठीक चल रहा है,” उन्होंने याद किया।
कोरोना काल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में भी नवल भैया लगातार उनका हालचाल लेते रहे। “वो अकेले ऐसे व्यक्ति थे, जो हर हफ्ते दो-तीन बार फोन कर हाल पूछते थे,” उन्होंने बताया।
पंकज ने यह भी कहा कि दोनों के विचार कई मामलों में अलग थे—राजनीति से लेकर जीवनशैली तक—लेकिन इसके बावजूद नवल भैया ने हमेशा उन्हें सम्मान और आत्मीयता दी। “उन्होंने कभी रिश्ते के बीच विचारों की दीवार नहीं आने दी,” उन्होंने कहा।
करीब तीन दशक पुराने इस आत्मीय रिश्ते के अंत पर पंकज श्रीवास्तव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षति अपूरणीय है।
नवल भैया का जाना शहर के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका सहज स्वभाव, लोगों के प्रति अपनापन और बिना किसी स्वार्थ के रिश्ते निभाने की आदत उन्हें हमेशा यादगार बनाए रखेगी।
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