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March 17, 2026 4:43 am

सरना कोड नहीं तो जनगणना नहीं, झामुमो का हुंकार, आदिवासी पहचान की लड़ाई तेज, पैदल मार्च निकाला व दिया धरना

हेमलाल मुर्मू का ऐलान- दिल्ली तक लड़ेंगे धर्म कोड की लड़ाई

जातिगत जनगणना से पहले धर्म कोड दो: स्टीफन

पाकुड़: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मंगलवार को सरना धर्म कोड की मांग को लेकर पाकुड़ में शक्ति प्रदर्शन किया। पुराने सदर अस्पताल से लेकर गोकुलपुर पेट्रोल पंप तक कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला। इसके बाद पेट्रोल पंप के पास एक दिवसीय विशाल धरना दिया गया। आंदोलन की अगुवाई लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने की। जिला अध्यक्ष अजीजुल इस्लाम समेत सैकड़ों कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए।धरने में शामिल लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि मोदी सरकार आदिवासियों की पहचान को खत्म करने की साजिश कर रही है।

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हमारी गिनती किसी जाति में नहीं हो सकती, जब तक धर्म कोड नहीं मिलता

विधायक हेमलाल मुर्मू ने धरने को संबोधित करते हुए कहा, “हम सरना धर्म कोड की लड़ाई पिछले 5-7 वर्षों से लड़ रहे हैं। झारखंड विधानसभा ने इसे सर्वसम्मति से पास कर केंद्र को भेजा, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला। देश में 8 से 10 करोड़ आदिवासी रहते हैं। अगर हमें धर्म कोड नहीं मिला, तो हमारी गिनती किसी जाति में नहीं हो सकती।उन्होंने आगे कहा, “ऐसे में आदिवासियों के सारे अधिकार खत्म हो जाएंगे, आरक्षण छिन जाएगा। हम दिल्ली तक लड़ाई लड़ेंगे। जेएमएम मजबूती से यह आंदोलन जारी रखेगी। 4 जून को एक और बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।”

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मांगें साफ: सरना धर्म कोड को मिले मान्यता, तभी हो जनगणना

जेएमएम कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक आदिवासियों को अलग धर्म कोड नहीं दिया जाता, तब तक उनकी जनगणना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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