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March 13, 2026 10:58 am

पुलिस अफसरों को कोर्ट की दो टूक: गिरफ्तारी हो तो वजह साफ हो, नहीं तो 41A का नोटिस दें।

पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के सभागार में शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेषनाथ सिंह के निर्देश पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) संजीत कुमार चंद्र की अध्यक्षता में हुई, जिसमें जिले के तमाम पुलिस अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के अहम निर्देशों से अवगत कराया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पुलिस और न्यायालय के समन्वय को बेहतर बनाना और नागरिकों को बिना कारण गिरफ्तारी जैसी परेशानियों से बचाना था। इसमें विशेष रूप से दो सुप्रीम कोर्ट के फैसलों—अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) और सतेंद्र कुमार अंटील बनाम सीबीआई (2022)—पर विस्तृत चर्चा हुई।

अब मनमानी गिरफ्तारी नहीं चलेगी

सीजेएम ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी मामले में पुलिस को गिरफ्तारी करने से पहले ठोस कारण बताना होगा। यदि मामला बेल योग्य है, तो 41A (अब 35(3) बीएनएसएस के तहत) का नोटिस तामिल कराना जरूरी होगा। बिना वजह गिरफ्तारी पर न्यायालय की सख्ती बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार करने के पहले पुलिस यह सुनिश्चित करे कि वह गिरफ्तारी वास्तव में आवश्यक है या नहीं। गिरफ्तारी की कार्रवाई पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों का न्यायपालिका पर भरोसा बना रहे।

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सभी थाना प्रभारियों को निर्देश

इस महत्वपूर्ण बैठक में पाकुड़ एसडीपीओ, महेशपुर एसडीपीओ, हेडक्वार्टर डीएसपी समेत जिले के सभी थाना प्रभारी शामिल रहे। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने पर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ संवाद।

बैठक में अपर न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्जवल बेक, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी विजय कुमार दास एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) की सचिव रूपा बंदना किरो भी मौजूद रहीं।

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