सनातन संस्कृति विश्व की सबसे पुरातन सभ्यता, हजारों सनातनी हुए शामिल।
राजकुमार भगत
पाकुड़ | प्रखंड अंतर्गत गोपीनाथपुर गांव में हिंदू समन्वय समिति के तत्वावधान में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में हजारों की संख्या में सनातनी हिंदुओं ने भाग लिया। इससे पूर्व गांव में पारंपरिक कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता संत स्वामी परमानंद महाराज एवं रांची के सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल जी ने प्रवचन दिए। स्वामी परमानंद महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे बड़ी, सभ्य और पुरातन संस्कृति है। उन्होंने कहा कि आज कुछ तत्व हिंदू समाज को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में समाज को एकजुट रहने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों को गुरुकुल परंपरा की शिक्षा देने, घर-घर सुबह-शाम शंखनाद करने और सभी धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाने की अपील की। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल जी ने कहा कि भारत के मंदिर हमेशा से हिंदू समाज की आस्था और सेवा का केंद्र रहे हैं। पुराने समय में मंदिरों के माध्यम से गरीब बेटियों के विवाह, बीमारों के इलाज और सामाजिक समस्याओं के समाधान में सहयोग किया जाता था। उन्होंने कहा कि समाज को कमजोर करने के लिए आक्रमणकारियों ने सबसे पहले सामाजिक एकता को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन अब समाज जागरूक हो चुका है। उन्होंने संतों और महापुरुषों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि समाज की रक्षा के लिए साधु-संतों ने अपना जीवन समर्पित किया है। पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने पेड़ लगाने, सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करने, नदियों व तालाबों को स्वच्छ रखने और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की अपील की। सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने देश के प्रति कर्तव्यों के पालन और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया। आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।







