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March 14, 2026 8:24 pm

मजदूरी से ‘स्ट्रॉबेरी’ की खेती तक, कपूर मुनी दीदी की आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी।

महेशपुर प्रखंड के साहेबनगर गांव की रहने वाली कपूर मुनी दीदी आज क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और आधुनिक खेती की मिसाल बन चुकी हैं। कभी खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली कपूर मुनी दीदी ने अपनी मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से स्वावलंबन की नई राह बनाई है।

संघर्ष से शुरू हुई आत्मनिर्भरता की यात्रा

कपूर मुनी दीदी की यह प्रेरक यात्रा वर्ष 2016 में शुरू हुई, जब सीआरपी दीदी के प्रोत्साहन से वह ‘गुलाब बाहा आजीविका सखी मंडल’ से जुड़ीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत की आदत विकसित की, समूह के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया और आजीविका के नए अवसरों के बारे में जानकारी हासिल की। यही से उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास मजबूत हुआ।

आधुनिक तकनीक से बदली खेती की तस्वीर

वर्ष 2025 में उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया, जब JICA परियोजना के अंतर्गत उन्हें सूक्ष्म टपक सिंचाई यंत्र उपलब्ध कराया गया।आधुनिक सिंचाई तकनीक का लाभ लेते हुए उन्होंने पहली बार अपने 25 डिसमिल खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करने का निर्णय लिया। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी तथा उद्यान विभाग, पाकुड़ के समन्वय से उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले स्ट्रॉबेरी पौधे एवं मल्चिंग प्लास्टिक उपलब्ध कराया गया, जिससे वैज्ञानिक तरीके से खेती करना संभव हो सका।

कम जमीन में बेहतर आमदनी

कपूर मुनी दीदी ने अब तक लगभग 15 किलोग्राम स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर ₹500 प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री की है, जिससे उन्हें ₹7,500 की शुद्ध आय प्राप्त हो चुकी है। उत्पादन बढ़ने के साथ इस सीजन में उन्हें लगभग ₹40,000 से ₹50,000 तक की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।

क्षेत्र के किसानों के लिए बन रहीं प्रेरणा

कपूर मुनी दीदी की इस पहल ने क्षेत्र के किसानों के बीच नई प्रेरणा जगाई है। साहेबनगर और आसपास के गांवों के किसान उनकी स्ट्रॉबेरी की क्यारियां देखने पहुंच रहे हैं और आधुनिक सिंचाई तकनीक तथा उन्नत बागवानी पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

जिला प्रशासन के प्रति जताया आभार

कपूर मुनी दीदी ने अपनी इस सफलता के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, उद्यान विभाग, पाकुड़, JICA परियोजना तथा अपने ‘गुलाब बाहा आजीविका सखी मंडल’ की सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सहयोग से ही उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाने और स्ट्रॉबेरी की सफल खेती करने का अवसर मिला।

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