जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल
मेदिनीनगर: नगर निगम के वार्ड संख्या 32 में नाली व सड़क की बदहाल स्थिति अब सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का मुद्दा बनती जा रही है। जब वार्ड 32 की जनता का सवाल पार्षद अनीशा खातून से सीधे सवाल किया कि वर्षों से चली आ रही नाली और सड़क की समस्याओं पर ठोस काम क्यों नहीं हुआ, तो उन्होंने अपनी सीमाओं का रखते हुए जवाब दिया।
पार्षद अनीशा खातून ने कहा कि उन्हें नाली सफाई के लिए केवल एक ही कार्मिक उपलब्ध कराया गया था, जिससे पूरे वार्ड में नियमित सफाई कर पाना संभव नहीं हो सका। उन्होंने नालियों के जाम होने के लिए जनता की लापरवाही को भी जिम्मेदार ठहराया और बताया कि लोग नालियों में डायपर, प्लास्टिक और अन्य कचरा डाल देते हैं।
डस्टबिन लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले डस्टबिन लगाने का प्रयास किया गया था, लेकिन कई स्थानों पर लोगों ने उसका सही उपयोग नहीं किया। डस्टबिन में झूठा खाना और डायपर डालने से स्थिति और खराब हुई, जिसके बाद कुछ लोगों ने डस्टबिन न लगाने की मांग भी की।
वहीं वार्ड संख्या 32 की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। वहां की नालियां इस कदर जाम हैं कि पानी ऊपर तक बह रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि सालों से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है—पार्षद की, अभियंता विभाग की या नगर निगम प्रशासन की?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आगामी चुनाव को देखते हुए अब जनता तय करेगी कि वह पुरानी नीतियों को दोहराएगी या बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाएगी। नाली और सड़क निर्माण का कार्य भले ही अभियंता विभाग के अधीन हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत का सामना जनता रोज़ कर रही है।
पार्षद अनीशा खातून ने अंत में यह कहा कि वार्ड 32 में कई समस्याएं हैं और वह दोबारा क्षेत्र में आकर इन पर काम करेंगी। हालांकि सवाल यह है कि क्या यह भरोसा जनता का विश्वास दोबारा जीत पाएगा या विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाकर और धार देगा।






