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April 12, 2026 11:42 pm

जंगल पर ‘पुष्पा राज’: शाल के पेड़ कटे, सिस्टम खामोश।

गुप्त सूचना पर वन विभाग की कार्रवाई, तस्करों पर शिकंजा कसने की तैयारी।

अमड़ापाड़ा/पाकुड़ – वन प्रमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर गठित स्तरीय छापेमारी दल ने शनिवार रात बड़ी कार्रवाई करते हुए सिंहदेहरी-आमझारी गांव के समीप सड़क पर अवैध लकड़ी लदा एक ट्रैक्टर जब्त किया। वन विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर यह सुनियोजित छापेमारी की। जानकारी के अनुसार विभागीय टीम जैसे ही मौके पर पहुंची, शाल के मोटे बोटों से लदा ट्रैक्टर चालक अपने निर्धारित गंतव्य की ओर बढ़ने की फिराक में था। टीम को देखते ही चालक ट्रैक्टर छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया। जब्त लकड़ियों को वन विभाग के स्थानीय कार्यालय में सुरक्षित रख लिया गया है। साथ ही इस अवैध कारोबार में संलिप्त तस्करों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जंगलों में लगातार हो रही कटाई, तस्करी का नेटवर्क सक्रिय।

अमड़ापाड़ा वन प्रक्षेत्र के आलूबेड़ा अंतर्गत सिंहदेहरी, पहाड़िया टोला, आमझारी और तालझारी सहित कई गांवों के जंगलों में शाल और जामुन जैसे बहुमूल्य पेड़ों की कटाई व अवैध तस्करी का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले एक से डेढ़ माह से यह गतिविधि तेज़ी से बढ़ी है। सूत्रों के मुताबिक कटे हुए पेड़ों के बड़े-बड़े बोटों को खांडोकांटा-बारगो मार्ग के जरिए पड़ोसी गोड्डा जिले के विभिन्न इलाकों में खपाया जा रहा है। इस अवैध कारोबार से वन विभाग को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल?

क्षेत्र में लगातार हो रही पेड़ों की कटाई और लकड़ी तस्करी के बावजूद स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभाग की सक्रियता नजर नहीं आ रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासन को इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। गौरतलब है कि यदि लकड़ियां रैयती भूमि की भी हों, तो उनके परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट (टीपी) अनिवार्य होता है। बिना वैध परमिट के लकड़ी का परिवहन पूरी तरह अवैध माना जाता है।

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