इकबाल हुसैन
पाकुड़: महेशपुर प्रखंड के जयपुर पंचायत अंतर्गत स्थित प्राथमिक विद्यालय अमृतपुर, दुबराजपुर एवं पत्थरघाटा में डीएमएफटी (District Mineral Foundation Trust) मद से किचेन शेड का निर्माण कराया जा रहा है। इस निर्माण कार्य की कुल प्राक्कलित राशि लगभग 9 लाख रुपये बताई जा रही है। लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही इसमें भ्रष्टाचार, घोर अनियमितता और नियमों की खुलेआम अनदेखी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानक के विपरीत घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। किचेन शेड निर्माण में मिट्टी युक्त बालू, अधपकी व कमजोर ईंटें, कम वजन और निम्न गुणवत्ता का सरिया तथा खराब किस्म के पत्थर लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी सामग्री से बना भवन ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता और कुछ ही वर्षों में जर्जर हो जाएगा।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में इंजीनियरिंग मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है। एक दीवार से सटाकर दूसरी दीवार खड़ी कर दी जा रही है, जिससे नींव और संरचना कमजोर हो रही है। इससे भविष्य में किचेन शेड के गिरने या गंभीर क्षति की आशंका जताई जा रही है, जो बच्चों और स्कूल कर्मियों के लिए खतरा बन सकता है।आरोप यह भी है कि निर्माण स्थल पर सूचना पट (प्राक्कलन बोर्ड) नहीं लगाया गया है। नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी योजना में योजना का नाम, लागत, कार्य एजेंसी, कार्य अवधि और विभाग का विवरण सूचना पट पर अनिवार्य रूप से अंकित होना चाहिए, लेकिन यहां इसका पूरी तरह अभाव है। इससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और राशि के दुरुपयोग की आशंका गहराती जा रही है।
निर्माण कार्य में लगे मिस्त्री और मजदूरों ने बताया कि यह कार्य मनोज चौबे के द्वारा कराया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि कार्य एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही, जिससे संदेह और भी गहरा गया है।इस पूरे मामले में जब कनिया अभियंता कैलाश कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि प्राथमिक विद्यालय अमृतपुर में इस्तेमाल हो रहा बालू घटिया गुणवत्ता का पाया गया है, जिसे बदलकर बेहतर बालू का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। वहीं उन्होंने ईंट की गुणवत्ता को सही बताया।लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अभियंता का यह बयान सिर्फ औपचारिकता है। उनका कहना है कि यदि सामग्री वास्तव में मानक के अनुरूप होती, तो मौके पर इतने बड़े पैमाने पर खराब सामग्री नजर नहीं आती। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि संबंधित अभियंता की मौन सहमति या मिलीभगत से ही घटिया निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच हो और दोषी ठेकेदार एवं अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मामले को लेकर आंदोलन और शिकायत का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।







