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March 1, 2026 3:35 pm

राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में होली रंगोत्सव और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सराबोर हुआ परिसर

अक्षय कुमार सिंह

रामगढ़। राधा गोविन्द विश्वविद्यालय प्रांगण में होली रंगोत्सव का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह और पारंपरिक रंगों के साथ किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं और आपसी भाईचारे एवं सौहार्द का संदेश दिया।

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कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक गीत-संगीत से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने होली के पारंपरिक गीतों, लोकनृत्य और रंगारंग प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत बना दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर छात्र-छात्राएं झूमते नजर आए। पूरे परिसर में “होली है” के उल्लासपूर्ण स्वर गूंजते रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी एन साह ने होली पर्व की शुभकामनाएं दीं और उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं।”

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सचिव प्रियंका कुमारी ने कहा कि होली रंगोत्सव के इस आयोजन ने विश्वविद्यालय परिसर को रंगों, खुशियों और ऊर्जा से भर दिया। ऐसे आयोजन पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव और आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं। मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (डॉ) रश्मि, कुलसचिव प्रो (डॉ) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो (डॉ) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, व्याख्यातगण एवं सैकड़ों की संख्या में छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे। रंगोत्सव के दौरान पारंपरिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा गया।

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सभी ने प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हुए सौहार्दपूर्ण वातावरण में पर्व मनाया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों के लिए हल्के जलपान की भी व्यवस्था की गई, जिससे उत्सव और भी यादगार बन गया। कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक रंगों के साथ होली उत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर फूलों एवं सब्जियों के अर्क से हल्के हरे, पीले, गुलाबी, बैंगनी, आड़ू (पीच) तथा लैवेंडर रंग तैयार किए गए और उन्हीं से होली खेली गई। कार्यक्रम का उद्देश्य रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से बचाव तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना रहा।

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