रेलिंग एक महीने में धराशायी, विभागीय लापरवाही और संवेदक की मनमानी उजागर।
राजकुमार भगत
पाकुड़। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर भले ही अभियान चलाए जा रहे हों, लेकिन हकीकत जमीन पर कुछ और ही कहानी कह रही है। जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर सोनाजोड़ी के पास स्थित पुलिया एक बार फिर बड़े हादसे को न्योता दे रही है। कुछ समय पहले इसी पुलिया से गिरकर एक बाइक सवार की मौत हो चुकी है। घटना के बाद सुरक्षा के नाम पर रेलिंग निर्माण का काम शुरू कराया गया था, लेकिन यह काम भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों की मांग थी कि पुलिया पर लोहे की मजबूत रेलिंग या कंक्रीट का पक्का बैरिकेड बनाया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके। लेकिन संवेदक ने सुरक्षा के नाम पर ईंटों की पतली दीवार खड़ी कर औपचारिकता निभा दी। दीवार पर प्लास्टर तक नहीं कराया गया। नतीजा यह हुआ कि महज एक महीने के भीतर यह दीवार टूटकर बिखर गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग काफी व्यस्त है। यहां से रोजाना भारी वाहन, ट्रैक्टर और तेज रफ्तार बाइक गुजरती हैं। ऐसे में ईंटों की कच्ची दीवार किसी भी तरह सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या विभाग ने काम की गुणवत्ता की जांच की थी? क्या निर्माण के दौरान किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर निरीक्षण किया? लोगों का आरोप है कि घटिया निर्माण के बावजूद विभाग ने काम पूरा मानकर भुगतान कर दिया। यह न सिर्फ सरकारी पैसे की बर्बादी है, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ भी है। अगर समय रहते मजबूत और मानक के अनुरूप रेलिंग नहीं बनाई गई, तो यहां फिर किसी की जान जा सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पुलिया पर तत्काल लोहे की मजबूत रेलिंग या कंक्रीट का स्थायी बैरिकेड बनाया जाए।





