एकादशी-संक्रांति का दुर्लभ संयोग, क्या कहता है पंचांग।
राजकुमार भगत
पाकुड़। मकर संक्रांति सूर्य उपासना का प्रमुख पर्व है, जिसे देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य देव की दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर शुरुआत होती है। इसी के साथ खरमास समाप्त होता है और शुभ कार्यों का मार्ग प्रशस्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह समय आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और पुण्य अर्जन के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मकर संक्रांति से ही दिन बड़े होने लगते हैं।
14 या 15 जनवरी को मकर संक्रांति?
इस वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। अलग-अलग ज्योतिषाचार्यों की राय अलग है, लेकिन अधिकांश ज्योतिषाचार्य 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाने को उचित मान रहे हैं। पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे होगा, जो शाम 5:45 बजे तक रहेगा। सूर्य संक्रांति का कार्यकाल लगभग 6 घंटे माना जाता है। चूंकि सूर्य का गोचर 14 जनवरी को ही हो रहा है, इसलिए अधिकतर विद्वान इसी दिन पर्व मनाने के पक्षधर हैं।
एकादशी और संक्रांति का विशेष संयोग
पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को 23 वर्षों बाद षटतिला एकादशी का विशेष संयोग बन रहा है। यह दुर्लभ योग मकर संक्रांति को और भी पुण्यदायी बना रहा है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान, उपवास और सूर्योपासना का विशेष महत्व है। एकादशी के कारण इस दिन चावल का सेवन और दान वर्जित रहता है। श्रद्धालु तिल, गुड़, दही, गंगाजल और पुष्प अर्पित कर भगवान सूर्य की आराधना कर सकते हैं तथा तिल-गुड़ का प्रसाद ग्रहण कर दान-पुण्य से अक्षय पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
15 जनवरी को भी मान्य है मकर संक्रांति
कुछ ज्योतिषाचार्य एवं सनातन धर्मी उदया तिथि को मानते हैं। इस आधार पर वे 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना शुभ मानते हैं। आप 14 या 15 जनवरी को पर्व मना सकते हैं। हालांकि 15 जनवरी गुरुवार होने के कारण इस दिन खिचड़ी बनाना और खाना निषिद्ध माना गया है।
निष्कर्ष।
ज्योतिषीय गणना और सूर्य गोचर के आधार पर अधिकांश विद्वान 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाने को अधिक शुभ मान रहे हैं, जबकि उदया तिथि मानने वाले 15 जनवरी को भी पर्व मना सकते हैं। श्रद्धालु अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार पर्व मनाकर सूर्य देव की उपासना कर सकते हैं।





