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February 11, 2026 6:26 am

डायन-बिसाही के अंधविश्वास ने ली तीन जानें, एक किशोरी गंभीर रूप से घायल

समाजसेवियों एवं चिकित्सकों की पहल से घायल को बेहतर इलाज के लिए मेदनी नगर भेजा गया

✍️ संजय कुमार
📍 पांकी, पलामू


पांकी थाना क्षेत्र अंतर्गत आसेहार पंचायत के कुसड़ी गांव स्थित पुरानी बथान में डायन-बिसाही जैसे घातक अंधविश्वास को लेकर घटित घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक और नृशंस वारदात में तीन लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई, जबकि एक 14 वर्षीय किशोरी गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद से गांव में दहशत, शोक और आक्रोश का माहौल व्याप्त है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव निवासी महेशी भुईया की मृत्यु के बाद उनके पुत्र प्रमोद भुईया एवं रविन्द्र भुईया ने गांव के ही कुछ लोगों पर डायन-बिसाही कराने का आरोप लगाया। इसी अंधविश्वास और आपसी आरोप-प्रत्यारोप ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और मामला खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया।

हिंसक झड़प के दौरान विजय भुईया (उम्र लगभग 45 वर्ष), उनकी पत्नी कलिया देवी (40 वर्ष) तथा 17 वर्षीय छोटू भुईया की मौके पर ही हत्या कर दी गई। वहीं इस घटना में ममता कुमारी (14 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही घायल को पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को चिंताजनक बताया।


अंधविश्वास की जड़ें आज भी गहरी

स्थानीय ग्रामीणों का दबी जुबान से कहना है कि क्षेत्र में आज भी ओझा-गुणी, टोना-टोटका और डायन-बिसाही जैसे अंधविश्वास गहराई से फैले हुए हैं। इसी के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आती रहती हैं, जिनमें निर्दोष लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि समय रहते यदि समाज और प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाता, तो शायद इस दर्दनाक घटना को टाला जा सकता था।


पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

घटना को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद करीब चार घंटे तक पांकी थाना पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। बताया जाता है कि घटना स्थल पर केवल चौकीदार की मौजूदगी रही। पुलिस की इस देरी को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष देखा गया और प्रशासन के प्रति असंतोष गहराता चला गया।


समाजसेवियों और चिकित्सकों की मानवीय पहल

इधर, इस भीषण त्रासदी के बीच समाजसेवियों और चिकित्सकों की मानवीय पहल पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। गंभीर रूप से घायल किशोरी के बेहतर इलाज के लिए समाजसेवी मिथिलेश पांडे एवं चिकित्सकों ने आपसी सहयोग से धन संग्रह किया और उसे उच्चस्तरीय इलाज हेतु मेदनी नगर (डाल्टनगंज) रेफर कराया। पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद जब बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता महसूस हुई, तब समाजसेवियों की तत्परता से घायल को समय पर रेफर किया जा सका।


स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन पर सवाल

इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मंजूलता दुबे ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी नजर नहीं आती। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि अस्पताल की एम्बुलेंस के लिए भी कई बार पीड़ित परिवारों को पेट्रोल का खर्च स्वयं उठाना पड़ता है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। गरीब और संकटग्रस्त परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ किसी दूसरी त्रासदी से कम नहीं होता।


समाजसेवी की अपील

समाजसेवी मिथिलेश पांडे ने कहा कि यह घटना पूरे समाज के लिए बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। आज भी अंधविश्वास के कारण निर्दोष लोगों की जान जा रही है, जो बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल किशोरी को समय पर बेहतर इलाज मिलना जरूरी था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार असहाय स्थिति में था। ऐसे समय में समाज का आगे आना मानवता का कर्तव्य है, इसी सोच के तहत चिकित्सकों और स्थानीय लोगों के सहयोग से पैसा इकट्ठा कर घायल को मेदनी नगर भेजा गया।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता दी जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए।


गांव में भय और तनाव का माहौल

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस कठिन समय में समाजसेवी और डॉक्टर आगे नहीं आते, तो शायद घायल किशोरी को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। ग्रामीणों ने समाजसेवियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे समय में यही लोग मानवता की सच्ची मिसाल बनते हैं।

घटना के बाद से पूरे गांव में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है। लोग अब भी सहमे हुए हैं और प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा गांव में शांति बहाल करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि ओझा-गुणी, डायन-बिसाही और अन्य कुप्रथाओं के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक और अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की जांच जारी है। अब पूरे क्षेत्र की नजर इस बात पर टिकी है कि दोषियों के खिलाफ कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई होती है तथा पीड़ित परिवार को कब तक न्याय और समुचित सहायता मिल पाती है।


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